नई दिल्ली । संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 27 मई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की। मोर्चा ने शुक्रवार को किसान संगठनों और कृषि श्रमिकों से अपील की कि वे केंद्र सरकार के हाल ही में जारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आदेश और 2026-27 खरीफ सीजन के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की मूल्य नीति रिपोर्ट की प्रतियां जलाएं। सीएसीपी कृषि मंत्रालय के अंतर्गत एक विशेषज्ञ सलाहकार संस्था है। यह संस्था खरीफ और रबी सीजन की अधिसूचित फसलों के लिए एमएसपी की सिफारिश करती है।
एसकेएम ने केंद्र सरकार पर ‘फर्जी’ एमएसपी व्यवस्था लागू करने का आरोप लगाया। साथ ही ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का किसानों पर बोझ डालने, उर्वरक संकट को संभालने में विफल रहने और खाद की बढ़ती कीमतों व डीजल की महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की। संगठन ने कालाबाजारी पर कार्रवाई न होने का भी आरोप लगाया।
इस संगठन ने 2021-22 में दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था। संगठन ने कहा कि वह 2026-27 खरीफ सीजन के लिए घोषित एमएसपी व्यवस्था, ईंधन की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी और उर्वरक संकट को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध और तेज करेगा।
एसकेएम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। उसने आरोप लगाया कि खरीफ सीजन से पहले यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई। संगठन ने यह भी कहा कि सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों के कारण ईंधन और उर्वरक की लागत बढ़ी है।
हाल ही में घोषित खरीफ फसलों पर एमएसपी को एसकेएम ने धोखा बताया। किसान संगठन ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय किसान आयोग (एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता) की ओर से सुझाए गए फॉर्मूले को नहीं अपनाया है, जिसमें एमएसपी को समग्र लागत (सी2) + 50 प्रतिशत लाभ के आधार पर तय करने की सिफारिश की गई थी।
किसान संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार सीएसीपी के जरिये लागत की ऐसी गणना करती है, जो किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत और श्रम को कम आंकती है। एसकेएम ने इसे ‘संगठित लूट’ बताया। संगठन ने ईंधन कीमतों में हालिया वृद्धि को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि कृषि में जरूरी होने के बावजूद किसानों को डीजल पर भारी करों का बोझ उठाना पड़ रहा है।
एसकेएम ने (सी2) + 50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, सभी फसलों की सार्वभौमिक खरीद, ईंधन कीमतों में कटौती, उर्वरक कीमतों में कमी, एनबीएस नीति की वापसी, कृषि मूल्य निर्धारण और कराधान पर राज्यों के अधिकारों का सम्मान और कृषि श्रमिकों के ऋण माफी की मांग दोहराई
संगठन ने कहा कि आंदोलन की योजना के तहत 17 जून को उसकी राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी और 28 जुलाई को नई दिल्ली में एक अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें आगे के कार्यक्रम और देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
केंद्र सरकार का कहना है कि एमएसपी सीएसीपी की सिफारिशों और विभिन्न आर्थिक कारकों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है, जबकि उर्वरक सब्सिडी और ईंधन कीमतों की समय-समय पर व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा की जाती है।
संयुक्त किसान मोर्चा की मांगें:
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