पैरा एथलीट समाज के लिए प्रेरणा स्रोत : डॉ. आरबी विश्वकर्मा

खेल एवं युवा मामलों विभाग और पीसीआई के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

गंगटोक : दिव्यांगजनों के शारीरिक एवं सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए खेल एवं युवा मामलों के विभाग द्वारा भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आज स्थानीय पालजोर स्टेडियम में समापन हो गया।

इस अवसर पर विभाग के निदेशक डॉ आरबी विश्वकर्मा ने अपने मुख्य भाषण में किसी भी सफल खेल आयोजन को संपन्न कराने में एथलीटों, कोचों और अधिकारियों की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर तीन मुक्केबाजी चैंपियनशिप्स के अपने अनुभवों को साझा करते हुए खेल क्षेत्र में आवश्यक अनुशासन, समर्पण और सामूहिक प्रयास को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेलों में केवल मैदान पर एथलीट के रूप में ही नहीं, बल्कि कोच, तकनीकी अधिकारी, आयोजक और मार्गदर्शक के रूप में भी हितधारक बनना महत्वपूर्ण है।

पैरा खेलों के महत्व को उजागर करते हुए, डॉ विश्वकर्मा ने कहा कि पैरा एथलीट अपने दृढ़ संकल्प, जुझारूपन और उपलब्धियों के माध्यम से समाज को लगातार प्रेरित करते रहते हैं। साथ ही, पैरा खेल दिव्यांगजनों के बीच शारीरिक कल्याण, मानसिक शक्ति और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐस में, उन्होंने पैरा एथलीटों को राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए अधिक अवसर, उचित बुनियादी ढांचा, तकनीकी सहायता और मंच उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने यह भी बताया कि सिक्किम सरकार के तत्वावधान में नवगठित ‘पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ सिक्किम’ भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयासरत है।

आज कार्यशाला के दूसरे दिन, विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन, वर्गीकरण प्रणालियों, तकनीकी नियमों और गोला फेंक, तैराकी, पावरलिफ्टिंग, निशानेबाजी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस तथा अन्य विभिन्न पैरा खेल विधाओं में होने वाली विभिन्न शारीरिक अक्षमताओं पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। दो दिवसीय यह कार्यक्रम 100 से अधिक पैरा एथलीटों, कोच और विशेष शिक्षक शामिल थे। सभी को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

आज के समापन कार्यक्रम में खेल व युवा मामलों के संयुक्त निदेशक सोनम पालजोर लेप्चा, विभागीय उप निदेशक नोरबू छिरिंग भूटिया भी उपस्थित रहे। द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता संध्या गुरुंग, पैरालंपिक एसोसिएशन ऑफ असम के महासचिव राजीव दे, संयुक्त सचिव गीत गुंजन डेका, विशेष शिक्षक, कोच, पैरा एथलीट और अन्य हितधारक शामिल हुए।

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