पटना । बिहार में जमीन सर्वे का काम लगातार जारी है। विशेष भूमि सर्वे के साथ बंदोबस्त कार्य को लेकर बिहार सरकार लगातार तेजी कर रही है। इस मसले पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल के साथ सीएम सम्राट चौधरी ने एक विशेष बैठक की। उसके बाद मुख्यमंत्री ने सख्त आदेश देते हुए कहा है कि सर्वे के कार्य में तेजी लाने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाने की जरूरत है। उन्होंने जमीन के सर्वे की गति में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करने और अधिकारियों को पारदर्शिता का ख्याल रखने का कड़ा निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि बिहार में जमीन से जुड़े मामले को लेकर किसी प्रकार की सुस्ती और लापरवाही नहीं बर्दाश्त की जाएगी।
सम्राट चौधरी की ओर से बैठक में अधिकारियों के लिए अल्टीमेटम जारी किया गया। उसके अलावा उन्होंने कार्यप्रणाली को लेकर स्पेशल ड्राइव चलाकर जमीन सर्वे के काम के रफ्तार को बढ़ाने की बात कही। उन्होंने साफ कहा है कि इस काम के लिए जितने एक्स्ट्रा अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा अमीन और कानूनगो की जरूरत हो, उन्हें विभाग तुरंत तैनात करे। इस प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ध्यान रहे कि शुरू में जमीन सर्वे के काम को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन जमीन स्तर पर हो रही परेशानी को देखते हुए इसकी अवधि का विस्तार करते हुए दिसंबर 2027 तक कर दिया गया है। बिहार सरकार हर हाल में तय समय सीमा के अंदर इसे पूरा करने का संकल्प लिया है।
जानकारी के मुताबिक सर्वे के काम को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए विभाग एआई टूल्स का भी प्रयोग कर रहा है। सभी जिला बंदोबस्त कार्यालय में एआई सेल का गठन किया गया है। उनके साथ- साथ आईटी मैनेजर, विशेष सर्वे बंदोबस्त पदाधिकारी और अमीन के साथ कानूनगो मिलकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के अलावा विभागीय मंत्री की ओर से साफ किया गया है कि लंबित पड़े आवेदनों को तुरंत निपटा दिया जाए। इसके तहत 30 मई तक ई- मापी, जमाबंदी सुधार और दाखिल- खारिज के लंबित मामलों को हर हाल में निपटाने का आदेश दिया गया है। जमीन मापी की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। सूचना के मुताबिक ऑफलाइन आवेदन अब नहीं लिए जा रहे हैं। जमीन मालिकों की परेशानी को और कम करने के लिए जियो टैग्ड तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए नियम बनाए गए हैं।
इसके अलावा आवेदन के तीन दिनों के भीतर अमीन का चयन कर दिया जा रहा है। इसके बाद अधिकतम 7 दिनों के भीतर जमीन की मापी कर दी जा रही है। मापी के 14 दिनों के भीतर पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। विभागीय मंत्री के मुताबिक स्पेशल ड्राइव के तहत कैंप लगाकर कागजातों- खतियान, जमाबंदी, रसीद, केवाला, रजिस्ट्री और पैतृक जमीन के लिए वंशावली का सत्यापन किया जा रहा है। अधिकारियों को साफ निर्देश है कि वे अपनी रिपोर्ट रोजाना मुख्यालय को दिया करें। सीएम की चेतावनी है कि प्रखंड और अंचल स्तर पर भ्रष्टाचार और जनता को परेशान करना किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं सीएम कार्यालय खुद प्रखंड कार्यालय, राजस्व अंचल कार्यालय और पुलिस थानों की सीधी मॉनिटरिंग कर रहा है।
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