गंगटोक : जंगल की आग की रोकथाम एवं नियंत्रण की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हेतु सिक्किम सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग और केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) के सहयोग से आज गंगटोक में एक क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें समूचे पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख हितधारक एक साथ आए और साथ ही जंगल की आग की रोकथाम और प्रतिक्रिया देने के क्षेत्र में सिक्किम के अनुकरणीय कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में कई राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारियों, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, विषय विशेषज्ञों और जमीनी स्तर के कर्मियों ने भाग लिया।
इसके उद्घाटन सत्र में, सिक्किम सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव सह पीसीसीएफ डॉ प्रदीप कुमार ने जंगल की आग की रोकथाम के प्रति सिक्किम के सक्रिय और प्रभावी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए इन उपलब्धियों को बनाए रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच निरंतर समन्वय और मजबूत सामुदायिक भागीदारी की जरूरत बतायी। उन्होंने जंगल की आग के व्यापक प्रभावों पर भी जोर दिया, जिनमें पानी की कमी और जन स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने जंगल की आग की रोकथाम और उसे कम करने के क्षेत्र में सिक्किम के नेतृत्व को मान्यता देने के लिए आईआईएफएम भोपाल का भी आभार व्यक्त किया।
वहीं, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक प्रभाकर राई ने आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से जंगल की आग के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के संबंध में प्राधिकरण और वन व पर्यावरण विभाग के बीच व्यापक सहयोग की सराहना की। उन्होंने एसएसडीएमए और डीडीएमए के साथ सहयोग करने के लिए वन व पर्यावरण विभाग द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की प्रशंसा की और सभी हितधारकों के बीच और अधिक समन्वय का आह्वान किया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में पूर्वोत्तर राज्यों में जंगल की आग के प्रबंधन से संबंधित राज्य-स्तरीय तैयारियों, संस्थागत रणनीतियों और जमीनी स्तर पर अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर प्रस्तुतियां दी गईं। सिक्किम वन विभाग की ओर से सीसीएफ (मुख्यालय/क्षेत्रीय) कर्मा लेगशे और डीएफओ (क्षेत्रीय), गंगटोक क्षितिज सक्सेना ने सिक्किम के मॉडल को प्रस्तुत किया। उन्होंने तैयारियों, समन्वय, पूर्व चेतावनी प्रणालियों, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणालियों और जंगल की आग के पूर्वानुमान पर आधारित मानचित्रण के क्षेत्र में किए गए नवाचारों पर प्रकाश डाला, जिन्होंने राज्य में आग प्रबंधन के परिणामों को काफी हद तक मजबूत बनाया है।
वहीं, असम, नागालैंड और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र जैसी अन्य एजेंसियों और राज्यों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को भी प्रस्तुत किया गया। साथ ही, समुदाय-केंद्रित आग की रोकथाम, पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत बनाने, संस्थागत समन्वय में सुधार करने, आग पर प्रतिक्रिया देने और आग के बाद की पुनर्प्राप्ति रणनीतियों को बेहतर बनाने पर केंद्रित अलग-अलग कार्य समूहों ने भी अपने निष्कर्ष और सुझाव प्रस्तुत किए।
इस दौरान, प्रधान शिक्षा तथा विज्ञान व प्रौद्योगिकी सचिव संदीप तांबे ने सिक्किम के संदर्भ में जंगल की आग पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की और पूर्वोत्तर राज्यों से आए प्रतिभागियों को अपने विचार साझा करने और सम्मेलन को समृद्ध बनाने के लिए धन्यवाद दिया। कार्यशाला का समापन राज्यों के बीच मजबूत सहयोग, आधुनिक तकनीक को पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के साथ एकीकृत करने और जंगल की आग से उत्पन्न होने वाली नई चुनौतियों से निपटने के लिए सभी स्तरों पर क्षमता बढ़ाने के रोडमैप के साथ हुआ।
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