गंगटोक : इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग सिक्किम (आईटीएस) के सदस्य डॉ भारत सी वशिष्ठ और डॉ नीरज अधिकारी ने सिक्किम के पारंपरिक ज्ञान, स्वदेशी संस्थाओं और समुदाय आधारित शासन व्यवस्था को राष्ट्रीय अकादमिक मंच पर प्रस्तुत किया। दोनों ने असम साइंस सोसायटी के 70वें वार्षिक तकनीकी सत्र और ‘ट्रेडिशन टू ट्रांसफॉर्मेशन : पाथवेज टू ए सस्टेनेबल एंड विकसित भारत @2047’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया।
सम्मेलन का आयोजन आईक्यूएसी, नौगांव विश्वविद्यालय, असम और असम साइंस सोसायटी की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। इसमें पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न संस्थानों से शिक्षाविद, वरिष्ठ प्रोफेसर, शोधकर्ता, शिक्षक, असम साइंस सोसायटी के सदस्य और पीएचडी शोधार्थी शामिल हुए। अकादमिक सत्र के दौरान डॉ भारत चंद्र बसीथा ने ‘ट्रेडिशनल नॉलेज सिस्टम एंड साइंस इन सिक्किम’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सिक्किम के पारंपरिक ज्ञान और स्वदेशी उपचार पद्धतियों के महत्व के साथ राज्य की समृद्ध जैव विविधता, उसके संरक्षण तथा इसमें आईटीएस की भूमिका पर प्रकाश डाला।
वहीं, डॉ. नीरज अधिकारी ने ‘ट्रेडिशनल गवर्नेंस, इंडिजिनस नॉलेज एंड कंटेम्परेरी पॉलिसी इनोवेशन: द केस ऑफ सिक्किम’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सिक्किम की पारंपरिक सामुदायिक संस्थाओं, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और समकालीन शासन एवं नीतिगत नवाचार में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा की। कार्यक्रम में असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष और असम साइंस सोसायटी के अध्यक्ष डॉ अरूप के मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। नौगांव विश्वविद्यालय के कुलपति, वरिष्ठ प्रोफेसर, शिक्षाविद, शोधकर्ता और पीएचडी शोधार्थी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। आईटीएस सदस्यों की भागीदारी से सिक्किम की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, स्वदेशी संस्थाओं और समुदाय आधारित शासन व्यवस्था को टिकाऊ विकास तथा विकसित भारत 2047 पर केंद्रित व्यापक राष्ट्रीय अकादमिक विमर्श में प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
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