हर शुक्रवार पांच मिनट, जीवनभर सुरक्षा

आपदा जोखिम न्यूनीकरण केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं : दास

गंगटोक : सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए) की ओर से भूमि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को स्थानीय चिंतन भवन में राज्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस-2026 मनाया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘तैयार बच्चे, सुरक्षित एवं सुदृढ़ भविष्य’ रखी गई थी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आपदा के प्रति जागरुकता बढ़ाना और स्कूल तथा सामुदायिक जीवन में सुरक्षा संबंधी अभ्यास को नियमित बनाना था।

कार्यक्रम में भूमि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विधायक सह सलाहकार एलबी दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ विभाग के अध्यक्ष टीटी भूटिया, एसएसडीएमए उपाध्यक्ष प्रो वीके शर्मा, राहत आयुक्त सह सचिव रिनजिंग चेवांग भूटिया तथा जियोहैजर्ड्स इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय निदेशक डॉ हरि कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

मुख्य अतिथि एलबी दास ने कार्यक्रम की शुरुआत में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं द्वारा लगाए गए खोज एवं बचाव उपकरणों के प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण किया। सभा को संबोधित करते हुए दास ने कहा कि 18 सितंबर 2011 का विनाशकारी भूकंप सिक्किम की आपदा संवेदनशीलता की गंभीर याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 की ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बदलते और जटिल आपदा जोखिमों को भी सामने रखा है। उन्होंने कहा कि आपदाओं ने नुकसान पहुंचाया, लेकिन कठिन समय में समुदायों की एकजुटता, साहस और सहयोग की भावना भी देखने को मिली।

इस वर्ष की थीम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे आपदाओं के दौरान संवेदनशील वर्ग में होते हैं, लेकिन सही प्रशिक्षण मिलने पर वे सुरक्षा और जागरुकता के महत्वपूर्ण दूत भी बन सकते हैं। स्कूल में सीखी गई जानकारियां बच्चों के माध्यम से परिवार और समाज तक पहुंच सकती हैं।

वहीं, दास ने राज्यभर में शुरू की गई विशेष पहल ‘फ्राइडे सेफ्टी फाइव’ का उल्लेख किया जिसका संदेश है- ‘हर शुक्रवार पांच मिनट, जीवनभर सुरक्षा।’ इस पहल के तहत स्कूलों, आईसीडीएस और आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रत्येक शुक्रवार पांच मिनट आपदा एवं सुरक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए निर्धारित किए जाएंगे। इनमें मॉक ड्रिल, खतरे की पहचान, सुरक्षित निकासी और प्राथमिक आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे अभ्यास शामिल होंगे।

दास ने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं रह सकता। सरकारी विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, पंचायतों, शहरी निकायों, युवा संगठनों, महिला समूहों, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, मजबूत सडक़-पुल, सुरक्षित स्कूल एवं अस्पताल, आपात संचार व्यवस्था और वैज्ञानिक जोखिम आकलन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। एसएसडीएमए के उपाध्यक्ष प्रो वीके शर्मा ने सिक्किम में ग्लेशियल झीलों की निगरानी और जीएलओएफ संबंधी तैयारियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की पहचान कर जोखिम न्यूनीकरण के उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों को आपदा जागरूकता का प्रभावी माध्यम बताते हुए जापान में स्कूली स्तर पर आपदा तैयारी को नियमित शिक्षा का हिस्सा बनाए जाने का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की आपदा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि अस्पतालों की संरचनात्मक एवं गैर-संरचनात्मक सुरक्षा का अध्ययन किया गया है और चिकित्सकों, नर्सों तथा स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। जियोहैजर्ड्स इंटरनेशनल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. हरि कुमार ने ‘भूकंप जोखिम के संदर्भ में स्कूल सुरक्षा’ विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार सुरक्षित शिक्षा के अधिकार से भी जुड़ा है। स्कूल भवन सुरक्षित होने के बावजूद यदि छात्रों और शिक्षकों को निकासी प्रक्रिया की जानकारी न हो तो आपदा के समय जान-माल का नुकसान हो सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को ड्रॉप, कवर एंड होल्ड, अग्निशामक यंत्रों के प्रयोग और स्कूल परिसर में संभावित खतरों की पहचान का नियमित अभ्यास कराने पर जोर दिया। उन्होंने स्कूल आपदा प्रबंधन योजना में स्पष्ट जिम्मेदारियां, सुरक्षित निकासी मार्ग, सभा स्थल, प्राथमिक उपचार और प्रत्येक छात्र व कर्मचारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल करने की सलाह दी। डॉ कुमार ने सुझाव दिया कि भविष्य में 18 सितंबर को वार्षिक स्कूल आपदा तैयारी अभ्यास दिवस के रूप में मनाने पर विचार किया जा सकता है।

इससे पहले, राहत आयुक्त सह सचिव रिनजिंग चेवांग भूटिया ने अपने स्वागत भाषण में 2011 के भूकंप में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि सिक्किम भूस्खलन, जीएलओएफ, आग और आकाशीय बिजली जैसी अनेक प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। वर्ष 2023 की जीएलओएफ घटना ने पर्वतीय भूभाग और नदियों से जुड़े जोखिमों की गंभीरता को एक बार फिर उजागर किया।

कार्यक्रम के दौरान ‘फ्राइडे सेफ्टी फाइव’ पहल को वीडियो प्रस्तुति और आधिकारिक अधिसूचना जारी कर राज्यभर में औपचारिक रूप से शुरू किया गया। इसके साथ जीएलओएफ तैयारी एवं जोखिम न्यूनीकरण पर लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। इस अवसर पर ‘फ्रॉम मल्टी-हैजर्ड रिस्क टू रेजिलिएंस: ए लॉन्गिट्यूडिनल सोशल साइंस स्टडी ऑन डीआरआर पॉलिसी एंड प्लानिंग इन सिक्किम’ नामक अध्ययन परियोजना भी शुरू की गई। इस अध्ययन में अमृता विश्वविद्यालय, आईआईटी रुड़की, सिक्किम विश्वविद्यालय और एसएसडीएमए मिलकर बहु-आपदा जोखिम, संवेदनशीलता, लचीलापन और आपदा प्रबंधन नीतियों का अध्ययन करेंगे।

कार्यक्रम में युवा आपदा मित्रों, एनसीसी, एनएसएस, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स और माई भारत से जुड़े स्वयंसेवकों को आपातकालीन प्रतिक्रिया किट प्रदान किए गए। सरकारी एवं निजी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों तथा आईसीडीएस केंद्रों को प्रशिक्षण सामग्री और आंगनबाड़ी केंद्रों को अग्निशामक यंत्र भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला अधिकारी, एसएसडीएमए और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एनसीसी, एनएसएस, नागरिक सुरक्षा, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National News

Politics