गंगटोक : सिक्किम के मंगन जिले के लाचेन स्थित दुर्गम गोचुंग और लाशर घाटियों में समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग की ओर से याक के बच्चों की एक अनोखी रैली आयोजित की गई। विगत 29 अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ग्रामीण विकास मिशन 2026-27 के तहत किया गया, जबकि वित्तीय सहयोग सिक्किम लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड ने प्रदान किया।
रैली में शामिल होने के लिए पशु चिकित्सा अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की टीम ऊंचाई वाले दुर्गम इलाके में करीब 18 किलोमीटर पैदल यात्रा कर डोंगकोंग क्षेत्र में रहने वाले याक पालकों तक पहुंची। वहां गर्मियों के दौरान प्रवास करने वाले याक पालक सामूहिक रूप से करीब 1,831 याकों की देखभाल करते हैं। कार्यक्रम का नेतृत्व अतिरिक्त निदेशक डॉ डेचेन कालियोन ने किया। उनके साथ पशु चिकित्सा अधिकारी और विभागीय कर्मचारी भी मौजूद रहे।
रैली में स्थानीय रूप से ‘ड्रोकपा’ कहलाने वाले 11 याक पालकों ने अपने याक बछड़ों के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में छिरिंग चोंडेन के बछड़े ने प्रथम स्थान हासिल कर 15 हजार रुपये का पुरस्कार जीता। वहीं, छिरिंग नोरबू के बछड़े को दूसरा स्थान और 12 हजार रुपये, जबकि पेमा थिनले के बछड़े को तीसरा स्थान मिलने पर 10 हजार रुपये प्रदान किए गए। शेष आठ प्रतिभागियों को पांच-पांच हजार रुपये की सांत्वना राशि दी गई।
बताया गया कि यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि हाल ही में भारत सरकार के राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो ने ‘सिक्किमी याक’ को अलग नस्ल के रूप में मान्यता दी है। प्रतियोगिता के साथ विभाग ने याक पालकों को पशु चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई। उन्हें कृमिनाशक दवाएं, बाहरी परजीवियों से बचाव की दवाएं और कैल्शियम सप्लीमेंट के साथ खाना पकाने का तेल तथा वाशिंग पाउडर भी वितरित किया गया।
विभाग की इस पहल का उद्देश्य राज्य के पारंपरिक याक पालक समुदाय को प्रोत्साहित करने के साथ दूरदराज के उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना था।
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