गंगटोक : जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित भारत-जापान बिजनेस डायलॉग में सिक्किम ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इस उच्चस्तरीय कारोबारी मंच पर भारत के 200 से अधिक उद्योग एवं व्यापार प्रतिनिधियों ने जापान के 200 से अधिक कारोबारी नेताओं, कंपनियों और संस्थानों के साथ निवेश, तकनीक और आर्थिक सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा की।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहे। सिक्किम की ओर से तेमी टी एस्टेट की प्रबंध निदेशक राधा प्रधान और सिक्किम सरकार से सिस्को बैंक के उपाध्यक्ष सुदीप प्रधान ने भाग लिया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर राधा प्रधान ने सिक्किम के चाय उद्योग की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने विशेष रूप से चाय पर्यटन, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, उत्पाद विकास और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों और संस्थानों के साथ प्रीमियम चाय उत्पाद, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच के क्षेत्र में साझेदारी की व्यापक संभावना है।
बैठक में सिक्किम के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में सहकारिता, एमएसएमई, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, ग्रामीण उद्यम, पर्यटन, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसरों को भी सामने रखा गया। प्रतिनिधियों ने जमीनी स्तर के उत्पादकों और उद्यमियों को बड़े बाजारों, आधुनिक तकनीक, वित्तीय संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क से जोड़ने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। जापानी संस्थानों के साथ तकनीक, प्रसंस्करण, विपणन, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
केइदानरेन में आयोजित भारत-जापान बिजनेस राउंड टेबल में दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’, आर्थिक सुरक्षा, नवाचार, तकनीक, मानव संसाधन आदान-प्रदान और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के बीच सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में 400 से अधिक भारतीय और जापानी व्यापार प्रतिनिधियों तथा संस्थागत हितधारकों की भागीदारी ने दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे आर्थिक संबंधों को रेखांकित किया। माना जा रहा है कि यह पहल सिक्किम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए निवेश, तकनीक, बाजार विस्तार, उद्यमिता और टिकाऊ ग्रामीण आर्थिक विकास के नए अवसर खोल सकती है।
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