गंगटोक : सिक्किम के हिमालयी प्राणी उद्यान (एचजेडपी) के धुंध से ढके जंगलों में लाल पांडा के दो नन्हे बच्चे संरक्षण की नई उम्मीद बनकर उभर रहे हैं। 15 जून 2025 को जन्मे भाई-बहन नुबा और नुमा अब स्वस्थ होकर तेजी से विकसित हो रहे हैं और प्राकृतिक व्यवहार सीखते हुए संरक्षण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।
नुबा और नुमा का जन्म एचजेडपी में लाल पांडा के माता-पिता लकी (2) और मिराक से हुआ। वर्तमान में दोनों का वजन करीब 3 से 3.5 किलोग्राम है और उनकी सेहत सामान्य रूप से बेहतर बनी हुई है। चिड़ियाघर की संरक्षण टीम लगातार उनके विकास पर नजर रख रही है।
इन दोनों शावकों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें कृत्रिम तरीके से पालने के बजाय उनके माता-पिता ने ही पाला है। करीब पांच महीने की उम्र में दोनों ने पेड़ों पर चढ़ना सीखना शुरू कर दिया था। लाल पांडा के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण प्राकृतिक व्यवहार है, क्योंकि वे अपने जीवन का काफी हिस्सा पेड़ों और जंगल की ऊपरी छतरी में बिताते हैं।
एचजेडपी की जू कंजर्वेशन बायोलॉजिस्ट डॉ मिनला जांग्मू लाचुंग्पा के अनुसार, प्रजनन कार्यक्रम के तहत सभी लाल पांडा शावकों को जानबूझकर उनके माता-पिता के साथ ही पाला जाता है और मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम रखा जाता है। इससे शावक भोजन तलाशने, पेड़ों पर चढ़ने और अपने आसपास के वातावरण को समझने जैसे प्राकृतिक व्यवहार सीधे अपने माता-पिता से सीखते हैं। नुबा और नुमा ने भी लकी (2) और मिराक से अपने आसपास की खोज करने, पेड़ों पर चढ़ने और दूसरे लाल पांडाओं के साथ व्यवहार करने जैसे महत्वपूर्ण कौशल सीखे हैं। दोनों अब लाल पांडों के बड़े समूह में भी अच्छी तरह घुल-मिल गए हैं और उनके माता-पिता भी स्वस्थ हैं।
हालांकि दोनों शावकों का जन्म मानसून के चरम समय में हुआ था, जिससे उनके शुरुआती जीवन में अतिरिक्त चुनौती सामने आई। लगातार बारिश और नमी के कारण लाल पांडा की माताएं अपने बच्चों को सूखे आश्रय की तलाश में एक घोंसले से दूसरे घोंसले में ले जा सकती हैं। इस दौरान शावकों के भीगने और बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। डॉ लाचुंग्पा ने बताया कि नुबा और नुमा के मामले में कम पर्यटक हस्तक्षेप और पर्याप्त सूखे घोंसले उपलब्ध होने के कारण स्थिति को सुरक्षित रूप से संभाला जा सका। इस दौरान चिड़ियाघर की टीम ने प्राकृतिक प्रक्रिया में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के बजाय उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
नुबा और नुमा का जन्म केवल दो नए लाल पांडा शावकों के आगमन तक सीमित नहीं है। यह हिमालयी प्राणी उद्यान के रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रोग्राम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह कार्यक्रम केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के लुप्तप्राय प्रजाति प्रजनन कार्यक्रम के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल कैद में लाल पांडा की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि आनुवंशिक रूप से सक्षम और स्वस्थ आबादी तैयार करना है, ताकि भविष्य में प्रजाति के दीर्घकालिक संरक्षण में इसका योगदान हो सके। एचजेडपी में भविष्य के प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए मुख्य परिसर से अलग एक समर्पित रेड पांडा कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भी है। प्रस्तावित केंद्र में संगठित प्रजनन के साथ लक्षित शोध पर भी ध्यान दिया जाएगा।
लाल पांडा सिक्किम की प्राकृतिक और जैव विविधता की पहचान का अभिन्न हिस्सा है। यह सिक्किम का राजकीय पशु है और राज्य के ऊंचाई वाले जंगलों में पाया जाता है। इसके अस्तित्व के लिए घने वन, पर्याप्त वनस्पति और सुरक्षित प्राकृतिक आवास बेहद जरूरी हैं। नुबा और नुमा अभी छोटे हैं, लेकिन उनके विकास की कहानी संरक्षण के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को सामने लाती है। उन्हें उनके माता-पिता के साथ प्राकृतिक वातावरण में बढ़ने दिया गया, पेड़ों पर चढ़ने और अपने आसपास की दुनिया को समझने का अवसर मिला और विशेषज्ञों ने केवल आवश्यक देखभाल एवं निगरानी की। हिमालयी प्राणी उद्यान के इन दोनों नन्हे लाल पांडा की बढ़ती उम्र के साथ उनका भविष्य संरक्षण कार्यक्रम में किस भूमिका तक पहुंचेगा, यह आगे तय होगा। फिलहाल नुबा और नुमा सिक्किम के लाल पांडा संरक्षण प्रयासों के लिए एक छोटी, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण उम्मीद बनकर सामने आए हैं।
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