‘विकसित सिक्किम 2047’ में वन और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

गंगटोक : इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग सिक्किम (आईटीएस) के सदस्यों ने सोमवार को वन, पर्यावरण एवं वन्यजीव प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर ‘विकसित सिक्किम 2047’ के तहत वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी दीर्घकालिक योजनाओं पर विचार-विमर्श किया। ताशीलिंग सचिवालय सभागार में आयोजित इस बैठक का नेतृत्व आईटीएस उपाध्यक्ष सीपी शर्मा ने किया।

इस अवसर पर विधायक सह वन, पर्यावरण एवं वन्यजीव प्रबंधन सलाहकार तेनजिंग नोरबू लाम्‍टा ने कहा कि विकास योजनाओं में संतुलन के साथ-साथ परिसंपत्तियों के रखरखाव और स्थिरता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि उचित रखरखाव न होने पर बनाई गई परिसंपत्तियां भविष्य में बोझ बन सकती हैं।

वहीं, योजना एवं विकास सचिव तुषार निखारे ने बताया कि विभिन्न विभागों के साथ परामर्श बैठकों का उद्देश्य ‘विकसित सिक्किम 2047’ के लिए उनकी कार्ययोजना, सुझाव और दृष्टिकोण प्राप्त करना है। मुख्य वन्यजीव वार्डन एवं मुख्य वन संरक्षक डॉ डी मंजूनाथ ने सिक्किम की समृद्ध जैव विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आवासों का विखंडन प्रमुख चुनौतियां हैं।

उन्होंने सिक्किम वन्यजीव क्षेत्र विजन-2047 के पांच प्रमुख लक्ष्यों की जानकारी दी, जिनमें जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व, हरित आजीविका और आधुनिक तकनीक आधारित वन्यजीव प्रबंधन शामिल हैं।

मुख्‍य वन संरक्षक ने बताया कि राज्य का लक्ष्य वर्ष 2047 तक फसल एवं पशुधन नुकसान में 75 प्रतिशत कमी लाना तथा वन्यजीव संघर्ष में मानव मृत्यु की घटनाओं को लगभग शून्य तक पहुंचाना है। इसके लिए वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा, रेड पांडा एवं ऊंचाई वाले क्षेत्रों की प्रजातियों के संरक्षण, स्मार्ट निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया जाएगा।

कार्यक्रम में वन विभाग के अतिरिक्त निदेशक (योजना) निश्चल गौतम ने बताया कि सिक्किम के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 47.33 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। वर्ष 2021 से 2023 के बीच वन क्षेत्र में करीब 17.37 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के लगभग 5,841 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (82 प्रतिशत) से अधिक भूभाग को रिकॉर्डेड फॉरेस्ट एरिया के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र में सिक्किम की हिस्सेदारी केवल करीब 0.2 प्रतिशत है, लेकिन देश की लगभग 26 प्रतिशत जैव विविधता यहां पाई जाती है। राज्य का संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क कुल भौगोलिक क्षेत्र का 30.77 प्रतिशत है, जो भारतीय राज्यों में सर्वाधिक है।

बैठक में वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। पांगोलाखा वन्यजीव अभयारण्य के गोरू जुरे क्षेत्र में 9,583 फुट की ऊंचाई पर पहली बार कैमरा ट्रैप में हिम तेंदुए की तस्वीर दर्ज की गई। इसी स्थान पर 6 दिसंबर 2018 को सिक्किम में पहली बार रॉयल बंगाल टाइगर की तस्वीर भी सामने आई थी। वर्ष 2026 में मिश्मी टाकिन के एक बड़े झुंड के देखे जाने को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।

बैठक में ‘मेरो रुख, मेरो संतति’, सिक्किम शिशु समृद्धि योजना, ‘माई चाइल्ड फ्रॉम वाइल्ड’, मिशन मिलियन ओक, स्प्रिंगशेड डेवलपमेंट, पोखरी संरक्षण और रूफ रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसी योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-जलागम विकास घटक 2.0 के माध्यम से ग्रामीण आजीविका और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी गई।

इसके अलावा वन संरक्षण कानून, सीएएमपीए, पर्यावरण एवं मृदा संरक्षण, सिल्वीकल्चर, वर्किंग प्लान, सर्वे एवं सीमांकन तथा अनुसंधान एवं शिक्षा से संबंधित विभिन्न शाखाओं ने भी प्रस्तुतियां दीं।

बैठक के अंत में आईटीएस सदस्य जेम्स सारिंग लेप्चा ने विभाग को कई सुझाव दिए। विभाग के आईटी सेल ने वन विभाग की वेबसाइट और डिजिटल प्रशासन से जुड़ी पहलों का भी प्रदर्शन किया।

बैठक में आईटीएस सदस्य नम्रता थापा, डॉ नीरज अधिकारी, डॉ भरत चंद्र वशिष्‍ट, डॉ सांगे दोरजी भूटिया और डॉ शिव कुमार शर्मा; वन, पर्यावरण एवं वन्यजीव प्रबंधन विभाग के एसओएफडीए के विशेष सचिव सह सीईओ डॉ एस अनबालगन; वन संरक्षक (पर्यावरण और मृदा संरक्षण) कर्मा लेगशे धोन्डुप; वन संरक्षक (वन्यजीव), सीएमएमपीए सीईओ और सदस्य सचिव उदय गुरुंग; वन संरक्षक (टी) सोनम चोडेन भूटिया; वन संरक्षक सूरज कुमार ठटाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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