नामची : नामची की जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग की अध्यक्षता में बुधवार को जिला प्रशासनिक केंद्र में जिला टीकाकरण कार्यबल, पीसी-पीएनडीटी सेल तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक, राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान, डीसी ने हाल में हुई समरदुंग सुरंग दुर्घटना के दौरान चिकित्सा कर्मियों की सेवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि घटना के बाद विस्तृत समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि कमियों की पहचान कर भविष्य में आपदा प्रबंधन और चिकित्सा प्रतिक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने लंबे समय तक आपात अभियान में कार्य करने वाले अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए परामर्श सत्र आयोजित करने का निर्देश दिया।
साथ ही, डीसी ने प्राथमिक उपचार, आपात चिकित्सा, मनोसामाजिक सहायता और संकट प्रबंधन से संबंधित विशेष प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। भविष्य की आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक समर्पित जिला चिकित्सा प्रतिक्रिया दल गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। बैठक में, जिला प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उदित प्रधान ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रसव पूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव और टीकाकरण की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव का वार्षिक लक्ष्य 99.3 प्रतिशत प्राप्त किया गया है। राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के दौरान 104.66 प्रतिशत कवरेज दर्ज किया गया, जबकि 28 जुलाई तक एचपीवी टीकाकरण अभियान में 96 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया।
वहीं, मुख्य नर्सिंग अधिकारी विजय लक्ष्मी राई ने पीसी-पीएनडीटी कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए बताया कि नामची जिले में आठ पंजीकृत अल्ट्रासाउंड क्लीनिक हैं। इनमें एक सरकारी और सात निजी क्लीनिक शामिल हैं। हाल में दो नए क्लीनिकों का पंजीकरण किया गया है। पुराने जिला अस्पताल में पड़ी पांच अनुपयोगी अल्ट्रासाउंड मशीनों को अन्यत्र स्थानांतरित करने अथवा निस्तारित करने के लिए समिति की मंजूरी की आवश्यकता बताई गई।
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच जिले की 12 स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रमाणित किया जा चुका है। कई अन्य स्वास्थ्य केंद्र जिला और राज्यस्तरीय मूल्यांकन पूरा कर राष्ट्रीय मूल्यांकन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आगे के प्रमाणीकरण के लिए जैव चिकित्सा कचरा निस्तारण व्यवस्था, विद्युत प्रमाणपत्र और स्थायी घेराबंदी जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
प्रधान मुख्य सलाहकार सह जिला नोडल अधिकारी डॉ. उर्गेन शेरपा ने बताया कि गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में करीब 20 हजार लोगों की जांच की गई है। इनमें उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित हजारों लोगों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से नि:शुल्क चिकित्सकीय परामर्श, दवाइयां और जांच सेवाएं भी प्रदान की गई हैं।
इसके अलावा, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. प्रतीक रसाइली ने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले में 1,333 सीवाईटीबी जांच की गईं, जिनमें 92 टीबी मरीजों की पहचान हुई। पात्र लाभार्थियों को टीबी निवारक उपचार भी दिया जा रहा है। बैठक में निक्षय पहल, रोग निगरानी और टीबी मरीजों की समय पर पहचान को मजबूत करने पर बल दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, रोग निगरानी को मजबूत बनाने, आपातकालीन तैयारियों को बढ़ाने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर नामची की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जुनिता योंजन, सीईओ जीपी शर्मा, वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी तथा आईसीडीएस, दृष्टि गैर-सरकारी संगठन और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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