भारत की तेल रणनीति में बड़ा बदलाव, वेनेजुएला से रिकॉर्ड खरीद

मई में 47 प्रतिशत बढ़ी सप्लाई

नई दिल्‍ली । मई में एक बड़ा उलटफेर हुआ है। वेनेजुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल (क्रूड) सप्लायर बन गया। इसने सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया। वेनेजुएला अब सिर्फ रूस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से पीछे है। यह बदलाव इसलिए आया क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और दूसरी रिफाइनरियों ने वेनेजुएला के सस्ते भारी कच्चे तेल (हैवी क्रूड) ग्रेड की खरीद बढ़ा दी।

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को उतनी ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है जितनी भारत चाहता है। नई दिल्ली की अपनी पहली यात्रा से पहले मियामी में रूबियो ने कहा, ठीक है, हम उन्हें उतनी ऊर्जा बेचना चाहते हैं जितनी वे खरीदेंगे। और जाहिर है, आपने देखा होगा, मुझे लगता है कि हम अमेरिकी उत्पादन और अमेरिकी एक्‍सपोर्ट के ऐतिहासिक स्तर पर हैं। उन्होंने आगे कहा कि वेनेजुएला के तेल के साथ भी अवसर हैं।

एनर्जी कार्गो ट्रैकर केप्‍लर ने बताया कि मई में वेनेजुएला ने भारत को 4,17,000 बैरल प्रतिदिन की सप्‍लाई की। यह अप्रैल में 2,83,000 बैरल प्रतिदिन और पिछले नौ महीनों में शून्य थी।

पिछले महीने अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने के बाद सप्‍लाई फिर से शुरू हुई। यह जनवरी में उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के कुछ हफ्तों बाद हुआ।

केप्‍लर में मुख्य विश्लेषक (रिफाइनिंग) निखिल दुबे ने कहा कि भारतीय खरीदारों ने वेनेजुएला के कच्चे तेल में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। कारण है कि यह आर्थिक रूप से आकर्षक है। जटिल रिफाइनिंग प्रणालियों के साथ यह मेल खाता है।

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के कारण भारत सात साल बाद अप्रैल में उस देश से कच्चे तेल का आयात फिर से शुरू कर सका। वैसे रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने कोई भी ईरानी कार्गो नहीं आया है। कारण है कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी कर रखी है।

अप्रैल में होर्मुज स्‍ट्रेट के लगभग बंद हो जाने के कारण शिपमेंट में बाधा आई। इसके बाद मई में इराक से कुछ सप्‍लाई भारत पहुंची। मई में भारत को इराक से 51,000 बैरल प्रतिदिन हासिल हुआ। यह फरवरी में रोजाना 9,69,000 बैरल था।

ईरान युद्ध से पहले भारत के तीसरे सबसे बड़े सप्लायर सऊदी अरब से होने वाली सप्लाई मई में लगभग आधी हो गई। यह घटकर 3,40,000 बैरल प्रतिदिन रह गई है। अप्रैल में यह 6,70,000 बैरल प्रतिदिन थी। दुबे ने इसकी मुख्य वजह सऊदी बैरल की आक्रामक कीमत को बताया।

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