पद्मा और तीस्ता पर बैराज बनाएगी बांग्लादेश सरकार: तारिक रहमान

फरक्का बैराज और जल संकट को लेकर भारत पर साधा निशाना

ढाका । बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार पद्मा और तीस्ता नदी पर बैराज बनाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार पानी की कमी को दूर करने और कृषि की रक्षा करने के लिए इन दोनों बैराज परियोजनाओं को लागू करेगी। बांग्लादेश के गाजीपुर शहर में एक सभा को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। वे वहां पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान की आधारशिला रखने पहुंचे थे।

बांग्लादेश के मीडिया आउटलेट डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, तारिक रहमान ने कहा कि आज आप सभी के सामने एक बात साफ कर देना चाहता हूं- इंशा अल्लाह, बीएनपी सरकार पद्मा बैराज और तीस्ता बैराज दोनों पर काम शुरू करेगी। तारिक रहमान सत्ताधारी बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष भी हैं।

तारिक रहमान ने बिना नाम लिए विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, बीएनपी ने तीस्ता के मुद्दे पर व्यवहारिक कदम उठाए हैं, जबकि अन्य लोगों ने केवल बड़े-बड़े बयान और वादे किए हैं। उन्होंने पद्मा बैराज को बांग्लादेश के लिए जरूरी बताया और कहा कि इससे उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों को फायदा होगा जिसमें राजशाही भी शामिल है।

Tarique Rahman ने बांग्लादेश के इलाके में नदी में पानी की कमी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, सूखे के मौसम में पद्मा नदी में पानी का बहाव कम हो जाता है, क्योंकि भारत सीमा के पास बने बैराजों के जरिए नदी के ऊपरी हिस्से से पानी निकाल लेता है, जिससे हमें कम पानी मिल रहा है।

तारिक ने कहा कि यह बैराज देश भर के किसानों और लोगों के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि फरक्का बैराज के कारण पानी का बहाव कम होने से समुद्र का खारा पानी दक्षिणी क्षेत्र में अंदर तक घुस रहा है। उन्होंने बढ़ते खारेपान के कारण सुंदरबन और आस-पास के इलाकों में पर्यावरण को लेकर चिंता जताई।

तीस्ता और पद्मा नदियों के जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से मामला चल रहा है। पद्मा को भारत में गंगा के नाम से जाना जाता है। बांग्लादेश ने तीस्ता नदी पर एक विशाल बैराज बनाने के लिए चीन से मदद मांगी है। तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट के नाम से बनने वाली इस परियोजना की नींव शेख हसीना के कार्यकाल में ही पड़ी थी। जुलाई 2024 में हसीना सरकार ने इस परियोजना में भारत से सहयोग की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन एक महीने के अंदर ही उनकी सरकार का पतन हो गया।

शेख हसीना के बाद आई मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने परियोजना को लेकर चीन का रुख किया, जिस पर चीन ने दिलचस्पी जाहिर की। भारत ने शुरू से ही इस परियोजना में चीन के शामिल होने को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। हालांकि, तारिक रहमान सरकार ने भी इस मुद्दे पर चीन का रुख किया है। हाल ही में चीन की यात्रा पर गए बांग्लादेशी विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने परियोजना में मदद के लिए चीन से औपचारिक अनुरोध किया, जिस पर चीन ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

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