गंगटोक : देश के सीमावर्ती गांवों के सतत विकास की रणनीतियों पर चर्चा करने हेतु राजधानी नई दिल्ली में 25 और 26 अगस्त को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में सीमावर्ती राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यशाला का उद्घाटन करने के साथ वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) लोगो लॉन्च किया और सभी अधिकारियों से कार्यक्रम के उद्देश्य को जमीनी स्तर पर साकार करने के लिए सच्ची भावना से लागू करने का आग्रह किया।
कार्यशाला में सिक्किम की ओर से गंगटोक के डीसी तुषार निखारे, सोरेंग डीसी धीरज सुबेदी, गेजिंग एडीसी सुरेश राई, पाकिम एडीसी जीएल मीणा, मंगन एसडीएम संदीप कुमार, गंगटोक के सहायक कलेक्टर भावेश ख्यालिया और वीवीपी की संयुक्त सचिव एवं नोडल अधिकारी खुशबू गुरुंग शामिल हुए।
इस दौरान, संयुक्त सचिव गुरुंग ने समूह चर्चा में भाग लिया और “सीमावर्ती क्षेत्रों में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में निजी क्षेत्र, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाज संगठनों की भूमिका” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
दो दिवसीय कार्यक्रम में, विभिन्न राज्यों द्वारा अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं और कार्यान्वयन में चुनौतियों पर प्रस्तुतियां दी गईं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने भी गांवों के चयन के पीछे के विचार, गांवों के आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्याप्त मुद्दों और राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ समन्वय में लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आगे के रास्ते पर प्रस्तुतियां दीं। वहीं, केंद्रीय मंत्रालयों से प्राप्त इनपुट उनके अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और उन्हें वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के साथ एकीकृत करने पर केंद्रित थे।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें वीवीपी-1 के अंतर्गत प्रगति और वीवीपी-2 के लिए रोडमैप; वीवीपी ऐप का विकास; दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी एवं बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए रणनीतियां; पर्यटन, पशुपालन एवं सहकारिता के माध्यम से आजीविका और कौशल विकास एवं अन्य शामिल रहे।
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