अध्यापन प्रक्रिया को बदलने की जरूरत : मंत्री राजू बस्नेत

स्कूल प्रमुखों के लिए पांच दिवसीय जागरुकता कार्यक्रम आयोजित

गंगटोक : सिक्किम के शिक्षा विभाग के तहत गवर्नमेंट सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रमुखों के लिए आयोजित पांच दिवसीय जागरुकता कार्यक्रम का आज लोअर बुर्तुक स्थित एससीईआरटी में समापन हो गया। कार्यक्रम में शिक्षा, खेल व युवा मामलों के मंत्री राजू बस्‍नेत (Raju Basnet) मुख्य अतिथि और प्रधान शिक्षा सचिव संदीप तांबे सम्मानीय अतिथि के तौर पर मौजूद थे। उनके साथ, वेतन एवं लेखा विभाग के प्रधान निदेशक बीबी सुब्बा भी मौजूद थे।

इस अवसर पर मंत्री बस्‍नेत ने अध्‍यापन प्रक्रिया को बदलने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा लेन-देन संबंधी हो सकती है, जो नियमित कामों पर फोकस करती है, या बदलावमूलक हो सकती है, जहां शिक्षक खोजपरकता, ऊर्जा और गहरी सीख को प्रेरित करते हैं। असली बदलाव तब होता है जब शिक्षण सक्रियता से विद्यार्थी के दिमाग को आकार देती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा समाज में बदलाव लाने की शुरुआत बच्चों की जिंदगी पर सकारात्मक असर डालने से होती है, जो बदले में पीढिय़ों का भविष्य बनाता है।

साथ ही, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूलों को उनके प्रमुखों को सौंपा जाना चाहिए, ताकि वे नतीजों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हों। अगले साल से, शत-प्रतिशत परिणाम पाने वाले संस्थानों के प्रमुखों को उसे स्वतंत्र रुप से प्रबंधित करने का अधिकार दिया जाएगा, जबकि कम प्रदर्शन वाले स्कूलों का विभाग समर्थन करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि यह अप्रोच सीखने, शामिल होने और आगे बढ़ने से संबंधित है।

वहीं, प्रधान शिक्षा सचिव संदीप तांबे ने सिक्किम के सरकारी स्कूलों की ताकत और चुनौतियों दोनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशिक्षित शिक्षकों, उक्दा बुनियादी ढांचे और काफी संसाधनों के बावजूद, राज्य में कई बच्चे निजी स्कूलों में जाते हैं, जो भरोसे की कमी को दिखाता है। उनके अनुसार, इसमें मुख्य चुनौतियां नामांकन में कमी, अंग्रेजी में कम जानकारी और बेसिक पढ़ाई-लिखाई में कमी शामिल है। निजी स्कूलों में 70 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 50 प्रतिशत विद्यार्थी ही विषय में अच्छी काबिलियत हासिल कर पाते हैं।

ऐसे में, तांबे ने माता-पिता एवं अभिभावकों का भरोसा बनाना और सीखने के नतीजों को बेहतर बनाना विभाग की उच्च प्राथमिकता बतायी। उन्होंने कहा कि पढ़ाना और सीखना उच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि अभिभावक इसी को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। नामांकन में कमी और निजी स्कूलों से प्रतियोगिता के साथ, शिक्षक बुनियादी सुविधा से लेकर छात्र के सीखने की कमी तक, हर रोज चुनौतियों को हल करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इससे पहले, एससीईआरटी निदेशक शांति राम अधिकारी ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि संस्थान नियमित तौर पर अलग-अलग विभागों के प्रशिक्षुओं के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। यह कार्यक्रम ऐसी ही एक पहल थी।

इस अवसर पर एससीईआरटी, सिक्किम के संयोजक अजय पोखरेल और लिंगदोक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल भावना गुरुंग ने भी वक्तव्य रखा। सत्र के दौरान, संस्थानों के प्रमुखों ने एक चर्चा सत्र में भी भाग लिया जहां मंत्री और अन्य गणमान्य लोगों के साथ बातचीत हुई। इसी तरह, टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस को सपोर्ट करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने में बहुमूल्य योगदान, समर्पण और प्रयासों के लिए रिसोर्स पर्सन और संस्थानों के प्रमुखों को प्रशंसा प्रमाण पत्र भी दिए गए।

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