गंगटोक : पूर्वोत्तर समेत सीमावर्ती राज्यों की विकास रणनीति को लेकर सिक्किम सरकार की ओर से नीति आयोग के साथ आज स्थानीय एक होटल में फ्रंटियर स्टेट डेवलपमेंट, फोकस ऑन नॉर्थ ईस्ट पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के बेरी, सिक्किम सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ महेंद्र पी लामा, सिक्किम सरकार के मुख्य सचिव आर तेलंग और सिक्किम सरकार के योजना एवं विकास सचिव एम टी शेरपा के साथ अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
इस कार्यशाला का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों के बीच जैविक खेती और हरित अर्थव्यवस्था के संपर्क को मजबूत करना, समावेशी उद्यमिता बढ़ाने हेतु अटल इनोवेशन मिशन के तहत एक क्षेत्रीय इनोवेशन नेटवर्क बनाना और सिक्किम समेत सभी पूर्वोत्तर राज्यों के सफल मॉडल पर एक इंटर-स्टेट कोलेबोरेशन के लिए प्लेटफॉर्म बनाना था। इसके अलावा, कार्यशाला में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को आगे बढ़ाने के लिए एक पॉलिसी रोडमैप और रीजनल कोलेबोरेशन के लिए एक फ्रेमवर्क विकसित करने पर भी फोकस किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने आयोग के मकसद बताते हुए विकसित भारत के संदर्भ में पूर्वोत्तर इलाके की चुनौतियों और मौकों पर बात की। साथ ही, उन्होंने राज्य की साफ-सफाई और शांति की तारीफ करते हुए वैश्विक मंचों पर अपनी जगह बनाने की सिक्किम की काबिलियत के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के विजन की ओर दूसरे राज्यों को गाइड करने में सिक्किम एक उत्प्रेरक की भूमिका में है।
वहीं, सिक्किम सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ महेंद्र पी लामा ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट रीजन विजन 2047, विकसित भारत 2047 का एक हिस्सा है। उन्होंने नए विकास ध्रुव के बारे में बोलते हुए सीमा को अवसर, चौतरफा कनेक्टिविटी मैट्रिक्स, रिवर्स इंटीग्रेशन और एक नए विकास मॉडल की जरूरत का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को भारत और पूर्वी दक्षिण एशिया के एक नए ग्रोथ पोल के तौर पर उभरना चाहिए। उन्होंने इस फ्रेमवर्क को एनईआर ग्रोथ क्वाड्रागंल बताते हुए कहा कि यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत 2047 में भूमिका निभाएगा।
इस बारे में, डॉ लामा ने कुछ जरूरी लक्ष्यों के बारे में बताया। जिनमें इस क्षेत्र को पूर्वी दक्षिण एशिया के पावर पूल के तौर पर विकसित करना, क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड एवं निवेश के जरिए सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र को प्रकृति तथा जैव विविधता आधारित उत्पादों के लिए एक हरित गंतव्य के तौर पर बनाना शामिल है। वहीं, उन्होंने लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए नॉर्थ ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर का भी प्रस्ताव रखा और समाज, अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक संसाधन, राष्ट्रीय सुरक्षा में क्षेत्र की ताकत और दक्षिण-पूर्व एशिया के गेटवे के तौर पर इसकी भूमिका पर ज़ोर दिया।
लामा ने आगे कहा कि पूर्वोत्तर इलाके में शांति और स्थिरता 2047 तक शांति का फायदा दे सकती है, जिससे इंसानी, राष्ट्रीय एवं पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ यह दूसरे अशांत इलाकों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगी।
कार्यक्रम में, नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने भी सिक्किम में कार्यशाला के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि आयोग कॉम्पिटिटिव फेडरलिज्म का समर्थन करने के साथ राज्यों को एक-दूसरे से सबसे अच्छे तरीके अपनाने के लिए बढ़ावा देता है। उन्होंने बढ़ते अर्थव्यवस्था विकास में सिक्किम के प्रदर्शन पर ध्यान देते हुए कहा कि इसकी कामयाबियां दूसरे पूर्वोत्तर राज्यों और देश के बाकी हिस्सों के साथ साझा करने के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करनी चाहिए। उन्होंने इन कामयाबियों को पाने में राज्य सरकार, ब्यूरोक्रेसी और सभी हितधारकों की समन्वित कोशिशों को स्वीकार किया।
इसके साथ, चंद ने बताया कि पर सिक्किम की कैपिटा इनकम में यह बड़ी बढ़ोतरी पिछले चार सालों में हुई है। राज्य पहले से ही प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विजन के साथ है और पर कैपिटा इनकम में लगातार सुधार, संतुलित क्षेत्रीय विकास और लोगों पर केंद्रित शासन के जरिए सबको साथ लेकर चलने वाला विकास दिखा रहा है।
इसके अलावा, मुख्य सचिव आर तेलंग ने कार्यशाला को खोजपरक और देश बनाने पर चर्चा हेतु एक मंच बताते हुए विकास में समुदाय की भागीदारी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्वयंसेवी समूहों के योगदान और बाजार, शासन तथा उद्योग में महिलाओं की भागीदारी का ज़िक्र करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों परंपरा, हेरिटेज, प्रकृति,पर्यटन और रचनात्मकता से जुड़े हुए हैं।
मुख्य सचिव ने सतत कृषि पर भी बात की। उन्होंने हथकरघा व हस्तशिल्प पर जोर देते हुए आधुनिक उद्योगों के विकास में युवाओं की भागीदारी की जरूरत बतायी। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को पूर्वोत्तर में विकास की नींव बताते हुए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, विकसित भारत 2047 और सीमा पार आर्थिक गतिविधियों जैसी पहलों का भी ज़िक्र किया।
कार्यशाला में इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग सिक्किम के उपाध्यक्ष सीपी शर्मा, सिक्किम राज्य सलाहकार, नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक मेजर जनरल के नारायणन, अन्य अधिकारी और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधिगण भी मौजूद थे।
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