परिवारों के विघटन का कारण बनता है नशा : बिष्ट

जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न

सोरेंग : सोरेंग जिले के जौतार इंडोर बैडमिंटन स्टेडियम में गुरुवार को जिलास्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता 2026 के साथ नशा मुक्त भारत अभियान (सिक्किम) पर एक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत माई भारत (गंगटोक) द्वारा खेल एवं युवा मामलों के विभाग (सोरेंग) तथा पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं में खेलों के प्रति भागीदारी बढ़ाना तथा नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया।

मुख्य अतिथि सोरेंग के एडीसी डीआर बिष्ट ने अपने संबोधन में नशा मुक्त भारत अभियान के सफल शुभारंभ पर आयोजकों को बधाई दी तथा प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नशा न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि परिवारों के विघटन का भी कारण बनता है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने एक्शन ट्रस्ट एनजीओ और मनोचिकित्सक डॉ. मनोज के सहयोग से अवसाद से पीड़ित लोगों की सहायता हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल 7 अप्रैल से एक वर्ष तक चलेगी, जिसके तहत जरूरतमंदों को परामर्श और सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे मामलों में प्रभावित व्यक्तियों को नजदीकी पीएचसी तक पहुंचाएं, ताकि उन्हें उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने अभिभावकों और समुदाय की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए सभी से जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने नशा मुक्त भारत की शपथ भी ली और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दोहराया। समाज कल्याण विभाग, गंगटोक के अतिरिक्त निदेशक महेश शर्मा ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा एक बीमारी है, जिससे सामूहिक प्रयासों द्वारा ही मुक्ति संभव है। उन्होंने युवाओं को एबीसी-अवॉइड बैड कंपनी का संदेश दिया और सही समय पर ना कहने की आवश्यकता पर जोर दिया।

माई भारत के उप निदेशक मंगल झांकर ने युवाओं को खेलों और रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। वहीं समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक राम कुमार तमांग ने भी नशे की समस्या पर निरंतर जागरूकता और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता बताई। माई भारत के संयुक्त निदेशक एवं नोडल अधिकारी जिग्मी लेप्चा ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

स्वास्थ्य परामर्शदाता (सीएचसी, सोरेंग) सुश्री यमुना ने तनाव एवं चिंता से राहत के लिए सरल अभ्यासों का प्रदर्शन किया और नशे के लक्षणों एवं दुष्प्रभावों की जानकारी दी।कार्यक्रम की शुरुआत में खेल एवं युवा मामलों के विभाग की उप निदेशक सह कार्यालय प्रमुख सुश्री ममता गुरूंग ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों और विकसित भारत के विजन पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं रहीं, जिनमें रस्साकशी, 100 मीटर दौड़, रिले रेस, फुटबॉल और बैडमिंटन शामिल थे। इन प्रतियोगिताओं में जिले भर के 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवक-युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और खेल भावना का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं के विजेताओं में फुटबॉल (बालक) में डांड़ागांव फुटबॉल एसोसिएशन, फुटबॉल (बालिका) में सोरेंग गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, 100 मीटर दौड़ में दिवाकर थापा और सोनिका लिम्बू, रिले रेस में इमैनुएल राई एवं टीम तथा अनुष्का राई एवं टीम, रस्साकशी में अर्पण राई एवं टीम और करिश्मा छेत्री एवं टीम विजेता रहे।

बैडमिंटन (पुरुष युगल) में यथार्थ लिम्बू और अंचु राई  तथा महिला वर्ग में छिरिंग ल्हामू शेरपा विजेता रहीं। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं और प्रतिभागियों को पदक एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए तथा विभिन्न क्लबों को खेल सामग्री भी वितरित की गई। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की वरिष्ठ कल्याण अधिकारी सुश्री प्रतिमा तमांग, विभागीय अधिकारी, जिला पुलिस के जवान, बीएड कॉलेज सोरेंग एवं चाकुंग सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

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