रचनात्मक लेखन के लिए संवेदशनशीलता जरूरी : सीपी शर्मा

पाकिम : रचनात्मक लेखन और छात्रों में शैक्षणिक विनिमय के बढ़ावे हेतु सिक्किम गवर्नमेंट कॉलेज के अंग्रेजी एवं नेपाली विभागों द्वारा आज “वॉयसेस अनलिश्ड” नामक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। इसमें इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग सिक्किम के उपाध्यक्ष और परी प्रकाशन के अध्यक्ष सीपी शर्मा मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उनके साथ राज्य के स्कूल शिक्षा सचिव ताशी चोफेल, सिक्किम विश्वविद्यालय के भाषा एवं साहित्य विभाग की निदेशक सह डीन प्रोफेसर रोजी चामलिंग और कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ शोभा शर्मा वशिष्ठ भी यहां मौजूद थे।

इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि शर्मा ने वर्तमान समय में रचनात्मक लेखन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लिखने की प्रक्रिया में मौलिकता, सोची-समझी अभिव्यक्ति और प्रतिबद्धता पर बात की। उन्होंने डिजिटल और एआई के जमाने में साहित्य के बदलते माहौल पर विद्यार्थियों को लगातार सीखने और सेल्फ-इम्प्रूवमेंट के लिए तैयार रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आगे कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए संवेदशनशीलता, पर्यवेक्षण और अनुशासित अभ्‍यास की जरूरत होती है। ऐसे में, उन्होंने युवा लेखकों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए अपने आस-पास और अनुभव से प्रेरणा लेने को कहा।

वहीं, सिक्किम विश्वविद्यालय के भाषा एवं साहित्य विभाग की निदेशक सह डीन प्रोफेसर रोजी चामलिंग ने एक शैक्षणिक अनुशासन के तौर पर रचनात्मक लेखन के इतिहास और विकास का अवलोकन दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भले ही रचनात्मकता जन्मजात हो, लेकिन लिखने की कला को दिशा-निर्देश, अञ्जयास और स्ट्रक्चर्ड लर्निंग से बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने ऐसी कार्यशाला को नए लेखकों को पहचानने, उन्हें बेहतर बनाने और बढ़ावा देने वाला एक मंच करार दिया।

इसके अलावा, सिक्किम गवर्नमेंट कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ शोभा शर्मा वशिष्ठ ने विद्यार्थियों को झिझक दूर करने और रचनात्मक लेखन के जरिए आत्मविश्वास के साथ खुद को अभिव्यक्त करने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उसी भाषा में लिखने की सलाह दी जिसमें वे सबसे अधिक सुविधाजनक महसूस करते हैं।

कार्यशाला में कंचनजंगा स्टेट यूनिवर्सिटी के नेपाली विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ सुचन प्रधान द्वारा संचालित तकनीकी सत्र के दौरान, स्कूल शिक्षा सचिव ने कविता और रचनात्मक लेखन पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान, एक चर्चा सत्र भी हुआ, जिससे विद्यार्थियों को आत्मविश्वास एवं मौलिकता के साथ रचनात्मक लेखन की खोज करने की प्रेरणा मिली।

कार्यक्रम में इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग के सदस्य नीरज अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी डीपी अधिकारी और कॉलेज के फैकल्टी सदस्य भी मौजूद थे।

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