गंगटोक : सिक्किम की ग्यारहवीं विधानसभा के चौथे सत्र के दौरान आज मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (Prem Singh Tamang) ने शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए सीट आरक्षण पैटर्न को लेकर चल रही चिंताओं पर बात की और इसका विस्तृत स्पष्टीकरण दिया।
सोशल मीडिया पर चल रहे असमान आरक्षण पैटर्न के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सीटों का आवंटन पूरी तरह से 2022 के राज्य सर्वे पर आधारित है। उन्होंने सदन को बताया कि यह सर्वे कैबिनेट द्वारा विधिवत पारित किया गया और वर्तमान आरक्षण राज्य भर के विभिन्न समुदायों की वास्तविक जनसंख्या अनुपात को दर्शाता है।
इसके साथ, मुक्चयमंत्री ने एक दशक से अधिक समय के सीट आरक्षण के तुलनात्मक आंकड़े साझा किए, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के प्रतिनिधित्व में एक व्यवस्थित वृद्धि को रेखांकित किया गया। उन्होंने 2015, 2021, और 2026 में सीट आरक्षण की तुलना करते हुए बताया कि इस अवधि में अनुसूचित जनजाति में सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई, जो 2015 में 15 और 2021 में 18 से बढक़र 2026 में 25 सीटें हो गई। ओबीसी (राज्य) के लिए 2015 और 2021 में 9 सीटों से बढ़कर 2026 में 11 सीटें हो गईं। वहीं, ओबीसी (केंद्र) के लिए 2021 में 6 सीटों तक गिरने के बाद 2026 के लिए यह संख्या बढ़ाकर 8 सीटें कर दी गई हैं। तमांग ने आगे बताया कि अनारक्षित सीटों की संख्या भी 2021 तक 12 सीटों पर स्थिर रही और 2026 में यह बढ़कर 13 सीटें हो गईं। अनुसूचित जाति के लिए तीनों चक्रों में 6 सीटों का लगातार प्रतिनिधित्व बनाए रखा है।
वहीं, इस संबंध में मुख्यमंत्री ने 2022 के सर्वे से मिले जनसंख्या के मूल आंकड़े भी साझा किए जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था का आधार हैं। इसके अनुसार, अनुसूचित जनजाति की संख्या सर्वे की गई जनसंख्या का सर्वाधिक 28 प्रतिशत (48,661) है। वहीं, अन्य (सामान्य/अनरक्षित) वर्ग की संख्या 42,718 (27 प्रतिशत), ओबीसी (राज्य) और ओबीसी (केंद्र) की संख्या क्रमश: 34,756 (20 प्रतिशत) और 29,562 (17 प्रतिशत) है। इसके अलावा, अनुसूचित जाति की संख्या 11,964 (6.88 प्रतिशत) है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और मौजूदा मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि समाज के हर वर्ग को राज्य में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व मिले।
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