गंगटोक : प्रेस सूचना ब्यूरो, गंगटोक ने आज एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय में आगामी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेला “सशक्त कारीगर, उज्ज्वल भविष्य” के संबंध में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। यह कार्यक्रम 19 और 20 फरवरी 2026 को एमजी मार्ग, गंगटोक में आयोजित किया जाएगा।
प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य आगामी कार्यक्रम के प्रति जनसामान्य में जागरुकता फैलाना और अधिक से अधिक लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। एमएसएमई-डीएफओ के सहायक निदेशक (ग्रेड-1) निर्मल चौधरी ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पंजीकृत कारीगरों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र एवं पहचान पत्र के माध्यम से आधिकारिक मान्यता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही उन्हें कौशल उन्नयन के अवसर दिए जाते हैं, जिनमें बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण, प्रतिदिन 500 रुपये का वजीफा तथा 1,000 रुपये का परिवहन भत्ता शामिल है।
योजना के अंतर्गत ई-वाउचर/ई-रूपी के माध्यम से 15,000 रुपये की टूलकिट प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, उद्यम विकास हेतु बिना गारंटी के ऋण सुविधा उपलब्ध है-पहली किश्त में 1 लाख रुपये तथा दूसरी किश्त में 2 लाख रुपये तक का ऋण 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर दिया जाता है। इस पर लगने वाला क्रेडिट गारंटी शुल्क भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन राशि तथा गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स, विज्ञापन-प्रचार, व्यापार मेलों एवं अन्य प्रचार गतिविधियों में भागीदारी हेतु विपणन सहयोग भी प्रदान किया जाता है।
एमएसएमई-डीएफओ के सहायक निदेशक (ग्रेड-1) अक्षय मुरकुटे ने बताया कि सिक्किम के विभिन्न जिलों से पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत पंजीकृत 50 से अधिक कारीगर इस कार्यक्रम में भाग लेंगे और अपनी पारंपरिक कला, शिल्प एवं उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने आगे बताया कि यह योजना 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल करती है, जिनमें बढ़ई, नाव निर्माता, शस्त्र निर्माता, लोहार, हथौड़ा एवं टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार एवं पत्थर तोड़ने वाले, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, चटाई एवं झाड़ू बनाने वाले/कॉयर बुनकर, पारंपरिक गुड़िया एवं खिलौना निर्माता, नाई, माला बनाने वाले, धोबी, दर्जी तथा मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले शामिल हैं।
प्रदर्शनी का उद्देश्य उत्पाद बिक्री, बाज़ार से संपर्क स्थापित करने तथा व्यापक पहचान के माध्यम से उनके कार्य को बढ़ावा देना है। इसी प्रकार, दोनों दिनों की संध्या में उसी मंच पर सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ओपन माइक सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सहायक निदेशक (ग्रेड-2) सुश्री निशा रानी तथा सहायक निदेशक (ग्रेड-2) डॉ. राहुल कांबले भी उपस्थित थे।
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