गंगटोक : सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के अध्यक्ष पवन चामलिंग ने गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संविधान के मूल्यों के प्रति आस्था दोहराने और सिक्किम की विशिष्ट पहचान की रक्षा का आह्वान किया।
अपने संदेश में चामलिंग ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत ने संविधान को अपनाकर स्वयं को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था। इसी संविधान ने देश के नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने और लोकतांत्रिक तरीके से अपना भविष्य तय करने का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान देश के निर्माण और उसकी निरंतर प्रगति की मजबूत आधारशिला है और इस वर्ष संविधान लागू होने के 77 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
उन्होंने संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में तैयार संविधान स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित है और यह वंचितों के अधिकारों की रक्षा तथा प्रत्येक नागरिक की गरिमा सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम बना। साथ ही उन्होंने संविधान सभा के सभी सदस्यों के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने गहन विमर्श के बाद इस ऐतिहासिक दस्तावेज को आकार दिया।
चामलिंग ने कहा कि संविधान ही देश में कानून के शासन को मजबूती देता है और नागरिकों के अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है। इसलिए इसे सुरक्षित रखना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। सिक्किम और संविधान के विशेष संबंध का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 16 मई 1975 को जनमत संग्रह के माध्यम से सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना, जो इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण है। उन्होंने इसे सिक्किमवासियों की सर्वोच्च देशभक्ति का प्रतीक बताया। इस योगदान और राज्य की विशिष्ट पहचान की रक्षा के लिए संविधान में अनुच्छेद 371 एफ को शामिल किया गया, जिसे अक्सर “सिक्किम का मिनी संविधान” कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 371एफ के माध्यम से सिक्किम के लोगों को भारतीय नागरिकता के साथ-साथ भूमि, पहचान और अन्य विशेष अधिकार सुरक्षित मिले, जिससे राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपरा के साथ भारत की विविधता को और समृद्ध कर सका।
पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों से अनुच्छेद 371एफ की सुरक्षा के प्रति सजग रहने और इसके संवैधानिक प्रावधानों का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह अधिकार केवल याद रखने के नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षित करने, बचाने और विवेकपूर्ण ढंग से अपनाने की जिम्मेदारी भी सभी की है।
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