मंगन : जिले में जंगू के पवित्र परिदृश्य में आज रु-सोम पुल का उद्घाटन किया गया। ही ग्याथांग के मणि क्योंग स्थित पारंपरिक लेप्चा तकनीकों और प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके पुनर्निर्मित यह पुल पीढिय़ों से चली आ रही स्थानीय मूल इंजीनियरिंग पद्धति का एक आकर्षक उदाहरण है।
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक सह सिक्किम के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री पिंछो नामग्याल लेप्चा (Pintso Namgyal Lepcha) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने उद्घाटन को प्रतिष्ठित रु-सोम की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और लचीलापन निर्माण, विरासत संरक्षण और वैज्ञानिक समस्या-समाधान में विभाग के व्यापक प्रयासों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि सुरम्य लोअर जोंगू में स्थित रु-सोम आने वाले दिनों में एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण होगा, क्योंकि इस स्थान पर अब तीन अलग-अलग युगों में निर्मित तीन पुल हैं, जो इस गंतव्य के आकर्षण को और बढ़ा देते हैं।
साथ ही, मंत्री ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों तुम्बोक और पुंतोम पुलित के लिए जीआई टैग हासिल करने वाली टीम को बधाई दी और इसके दस्तावेजीकरण कार्य का नेतृत्व करने वाले नामग्याल लेप्चा और उगेन लेप्चा को सम्मानित भी किया गया।
इससे पहले, विज्ञान व प्रौद्योगिकी सचिव धीरेन श्रेष्ठ ने कहा कि रु-सोम का दस्तावेजीकरण विभाग के बौद्धिक संपदा अधिकार अनुभाग द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने योजना प्रक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की और तकनीकी प्रामाणिकता के संरक्षण के महत्व पर बल दिया। पुनर्निर्माण का नेतृत्व करने वाले कुशल कारीगरों डुप्डेन लेप्चा और ताकजेन लेप्चा को सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि सिक्किम के विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शुरू की गई “रु-सोम पहल” का उद्देश्य पारंपरिक लेप्चा बेंत के पुलों को पुनर्जीवित, पुनर्निर्माण और दस्तावेजीकरण करना है जो समुदाय के अपने प्राकृतिक परिवेश के साथ गहरे सामंजस्य का प्रतीक हैं। नया पुल पूरी तरह से स्थानीय सामग्री और पारंपरिक तरीकों से बनाया गया है, जिसकी शुरुआत बोंगथिंग्स (लेप्चा शमन) द्वारा किए गए पवित्र अनुष्ठानों से होती है।
यह परियोजना अंतर-पीढ़ीगत शिक्षा पर जोर देती है, जहां कुशल कारीगर युवा कारीगरों को प्रशिक्षित करते हैं। वहीं, मानवशास्त्रीय अध्ययनों, वीडियो संग्रह और वैज्ञानिक रिकॉर्डिंग के माध्यम से गहन दस्तावेजीकरण यह सुनिश्चित करता है कि ज्ञान भावी पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रहे।
इस पहल को राज्य सरकार और यूनेस्को के सहयोग से समर्थन प्राप्त है, जो दस्तावेजीकरण को अंतरराष्ट्रीय विरासत मानकों के अनुरूप बनाने के लिए मार्गदर्शन कर रहा है। संकलित सामग्री को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत ढाँचे के अंतर्गत विचारार्थ यूनेस्को को प्रस्तुत किया जाएगा।
उक्त उद्घाटन कार्यक्रम में उपाध्यक्ष सोनम किपा भूटिया, बागवानी अध्यक्ष ओंगकित लेप्चा, प्रधान विज्ञान व प्रौद्योगिकी सचिव डॉ संदीप तांबे, संस्कृति विभाग के मुख्य अभियंता रिम्प दोरजी लेप्चा, एडीसी विकास डॉ सोनम रिनचेन लेप्चा, जोंगू एसडीएम गिदोन लेप्चा, बीडीओ डॉ महेंद्र तमांग, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी राजदीप गुरुंग, वरिष्ठ सलाहकार जेनी बेंटले एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
#anugamini #sikkim
No Comments: