सोरेंग : ट्रांसजेंडरों के अधिकारों एवं कल्याण, सामाजिक समावेश और नशीली दवाओं के दुष्प्रभावों को लेकर जिला सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा आज स्थानीय रुर्बन कॉम्प्लेक्स में में एक जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका मकसद लोगों में कानूनी नियमों, कल्याणकारी उपायों और सामाजिक दायित्वों के बारे में जागरुकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में जिले के अतिरिक्त राजनीतिक सचिव एरॉस लेप्चा मुक्चय अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उनके साथ, डीसी धीरज सुबेदी और रिसोर्स पर्सनों के रुप में रेनबो हिल्स वेलफेयर एसोसिएशन के अभिनाम मंगर, सिक्किम की पहली थर्ड-जेंडर मतदाता संजय बसनेत एवं अधिवक्ता तनचोक सुब्बा ने भी इसमें शिरकत की।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि लेप्चा ने सबको साथ लेकर चलने वाला समाज बनाने के लिए आपसी सम्मान, बराबरी और अलग-अलग तरह की चीजें अपनाने की अहमियत को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ट्रांसजेंडरों और दूसरे पिछड़े समुदायों के प्रति सोच बदलने और संवेदनशीलता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं को हमदर्दी रखने, अलग-अलग बातों का सम्मान करने और अपने परिवार और समाज में अच्छा योगदान देने के लिए बढ़ावा दिया। वहीं, राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के “सुनहरे, समृद्ध और समर्थ सिक्किम” के विजन का ज़िक्र किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसी धीरज सुबेदी ने देश में ट्रांसजेंडर अधिकारों के विकास के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने आर्टिकल 14, 15, 16 और 21 के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त खुद की पहचान के अधिकार और ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) कानून, 2019 के मुख्य प्रावधानों पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने नशे की लत को एक सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बताया और सामाजिक समर्थन और लागू करने को मिलाकर एक दयालु नज़रिए की वकालत की।
इससे पहले प्रतिभा तमांग ने अपने स्वागत भाषण में ट्रांसजेंडरों को मिलने वाले सरकारी सहायता की जानकारी देते हुए कल्याणकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए आधिकारिक पंजीकरण पोर्टल के बारे में बताया। उन्होंने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत होने वाले एक स्किट कॉम्पिटिशन के बारे में भी बताया और नशे के नुकसान के बारे में बात की।
इसके अलावा, रिसोर्स पर्सन अभिनाम मंगर ने सामाजिक एकीकरण, कल्याण और सरकारी समर्थन के संदर्भ में ट्रांसजेंडर मुद्दों पर बात की। उन्होंने सामाजिक कलंक, लागू करने में कमी और स्वास्थ्य सुरक्षा तक सीमित पहुंच, खासकर ग्रामीण इलाकों में जेंडर-अफर्मिंग केयर सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियों पर चर्चा की। ऐसे में, उन्होंने सामुदायिक आयोजन, जमीनी स्तर पर जागरूकता एवं सपोर्ट नेटवर्क और ट्रांसजेंडरों को अधिकार और सर्टिफिकेशन पाने में मदद करने में कानूनी मदद की भूमिका के महत्व पर जोर दिया।
मंगर ने राज्य सरकार के नजरिए का जिक्र करते हुए शैक्षणिक संस्थान एवं नियुक्तियों में आरक्षण, ग्रेजुएशन तक शत-प्रतिशत स्पॉन्सरशिप और ट्रांसजेंडरों के लिए अलग-अलग वित्तीय भत्तों जैसी पहलों पर जोर दिया। उन्होंने 2023 तक सिक्किम में आधिकारिक तौर पर 31 पंजीकृत ट्रांसजेंडर होने की जानकारी देते हुए बताया कि कई जिलों में अभी भी ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल नहीं बने हैं। उन्होंने सरकारी और निजी संस्थानों में जागरूकता और जेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट जारी करने में तेजी लाने की जरूरत भी बतायी।
कार्यक्रम में अन्य रिसोर्स पर्सन सह पहले थर्ड-जेंडर मतदाता संजय बसनेत ने ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी और समावेशन पर अपने निजी अनुभवों और नजरिए साझा किए। उन्होंने खुद की पहचान, इज्जत और बराबर मौकों की अहमियत पर बात की, साथ ही सामाजिक कलंक, भेदभाव और जागरुकता की कमी से पैदा होने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया।
कार्यक्रम में अन्य रिसोर्स पर्सनों अधिवक्ता ताशी डोमा भूटिया, अधिवक्ता तनचोक सुब्बा और पुलिस इंस्पेञ्चटर नारायण राई ने भी वक्तव्य रखा। इस अवसर पर एडीसी (विकास) गायास पेगा, एसडब्ल्यूडी गंगटोक के संयुक्त निदेशक पेम्पा नोर्बू शेरपा, उप निदेशक राम तमांग, सीएमओ स्मृति राई, उप निदेशक (एस एंड वाईए) श्रीमती मामिता गुरुंग, एसडब्ल्यूओ श्रीमती प्रतिभा तमांग, पंचायत अध्यक्ष एवं सदस्य, बीडीओ अरुण शर्मा और अन्य भी उपस्थित थे।
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