गंगटोक : आज एक ऐतिहासिक अवसर पर सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने बरदांग में ‘सिक्किम प्रेरणा स्थल’ के विस्तारित एवं नवीनीकृत परिसर का मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन किया। यह समारोह भारतीय सेना (ब्लैक कैट डिवीजन) के तत्वावधान में राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित हुआ। इस अवसर पर ब्लैक कैट डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल एमएस राठौर उपस्थित रहे एवं सेना के अन्य अधिकारियों की भी उपस्थिती रही।
सिक्किम प्रेरणा स्थल की संकल्पना एवं विकास की यात्रा लोकभवन, सिक्किम में राज्यपाल के सक्रिय सहयोग, मार्गदर्शन एवं दूरदर्शिता से संभव हुई है। यह स्थल न केवल अक्टूबर 2023 की बाढ़ आपदा में शहीद हुए 22 वीर जवानों की स्मृति में स्थापित हुआ, बल्कि अब इसे विस्तार देकर सिक्किम एवं पूरे देश के उन सभी सैनिकों को समर्पित किया गया है जिन्होंने विभिन्न अभियानों में बलिदान दिया। यहां कुल 13 अभियानों में शहीद हुए 294 वीरों के नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं।
इसे गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए राज्यपाल ने सर्वप्रथम भारतीय सेना, राज्य सरकार, सेलो फाउंडेशन (सीएसआर सहयोग) एवं सभी सहयोगियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह स्थल अब केवल स्मृति का केंद्र नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह स्थल मिलिट्री-सिविल फ्यूज़न का उत्कृष्ट उदाहरण है।
राज्यपाल ने कहा कि इस स्थल पर आने वाली पीढ़ियां और सभी आगंतुक हमारे इतिहास की गौरवशाली घटनाओं से अवगत हो सकेंगे, जिससे राष्ट्रप्रेम, त्याग एवं वीरता की भावना सदैव जीवंत रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार अन्य सीमावर्ती राज्यों के शहीदों की शौर्य गाथा उजागर होती है, उसी प्रकार चलचित्र, डाक्यूमेंट्री आदि के माध्यम से सिक्किम की भी पहचान स्थापित होनी चाहिए।
इस कार्यक्रम में दो डॉक्यूमेंट्री फिल्में- ‘सेंटीनेल ऑफ सिक्किम’ और ‘द सिक्किम सागा’ का विमोचन हुआ। ‘द सिक्किम सागा’ में 1967 के नाथू ला युद्ध में मेजर जनरल सगत सिंह की शौर्य गाथा प्रदर्शित की गई है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष राज्यपाल ने अपनी दूरदर्शिता और सोच से नाथूला दिवस को ‘नाथूला विजय दिवस’ की मान्यता दिलाते हुए इच्छा व्यक्त की थी कि 1967 के नाथूला युद्ध की सैन्य गौरव गाथा को विशेष रूप से उजागर किया जाए। इसी कड़ी में मेजर जनरल सगत सिंह (तत्कालीन 17 माउंटेन डिवीजन के जीओसी) की वीरता एवं साहसिक भूमिका को सभी के समक्ष लाने का निरंतर प्रयास किया गया है। उन्होंने उच्च कमान के पीछे हटने के निर्देशों को ठुकराते हुए नाथूला पर अडिग रहने का साहस दिखाया। उनकी दृढ़ता, रणनीतिक दूरदर्शिता एवं नेतृत्व ने भारतीय सेना को उल्लेखनीय सफलता दिलाई, जिससे 1962 के बाद राष्ट्र का आत्मविश्वास और सैन्य गौरव पुनः स्थापित हुआ। यह युद्ध सिक्किम की सीमाओं पर भारत की संप्रभुता की रक्षा का सुनहरा अध्याय है।
प्रेरणा स्थल परिसर में रणभूमि एवी हॉल (सिक्किम की सैन्य इतिहास प्रदर्शित करने वाला), कैफेटेरिया और रिफ्लेक्सोलॉजी पार्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह पहल बैटलफील्ड टूरिज्म को बढ़ावा देती है और डोक-ला, चो-ला जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के साथ पर्यटकों को सिक्किम की वीरता से जोड़ती है।
आज के कार्यक्रम में प्लेक अनावरण, सर्वधर्म पूजा के बाद वीर शहीद सैनिकों को राज्यपाल द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों द्वारा मार्शल आर्ट्स, स्नो लायन डांस (सिंघी चाम) और चेंडमेलम कलारीपयट्टू जैसी प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि, सेना के अधिकारी, जवान, शहीदों के परिजन और स्कूल के बच्चे उपस्थित रहे।
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