नामची : जिले में प्रभावी बाल संरक्षण सुनिश्चित करने और विभागों के बीच समन्वित प्रयास मजबूत करने के उद्देश्य से जिला टास्क फोर्स (डीटीएफ) की बैठक आज नामची म्युनिसिपल काउंसिल के सम्मेलन कक्ष में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त नामची अनुपा तामलिंग ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने श्रम विभाग से अपील की कि वह केवल श्रमिक पंजीकरण तक सीमित न रहकर पूरे जिले में बाल श्रम के खिलाफ व्यापक जागरुकता शिविर आयोजित करे। उन्होंने श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के संयुक्त प्रयासों से बाल श्रम उन्मूलन हेतु सक्रिय पहल की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने विभागों को जमीनी स्तर पर अधिक जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा चेकपोस्ट से संबंधित अधिकारियों को समय पर और सटीक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रगति की नियमित निगरानी और बाल संरक्षण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डीटीएफ की मासिक बैठक आयोजित करने का भी प्रस्ताव रखा और सभी विभागों से संबंधित बाल संरक्षण कानूनों के तहत समर्पण के साथ कार्य करने की अपील की।
प्रोटेक्शन ऑफिसर/आईसी नामची मेघा प्रधान ने जिले में बाल श्रम के मामलों की स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि बाल तस्करी अक्सर बाल श्रम से जुड़ी होती है। उन्होंने बताया कि किसी बच्चे को बचाने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के अनुसार तथा सभी संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में की जाती है।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष कालदेन जेड भूटिया ने बचाव और पुनर्वास प्रक्रिया में बाल कल्याण समिति की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू अभियान के दौरान बच्चे से उचित बातचीत और निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया जाता है। बचाए गए बच्चों को आश्रय प्रदान किया जाता है और उसके बाद पुनर्स्थापन तथा प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। जिन मामलों में अभिभावकों के पास बच्चे की पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं होते, वे संबंधित वार्ड पंचायत से बोनाफाइड प्रमाणपत्र प्राप्त कर अभिरक्षा का दावा कर सकते हैं।
सीडब्ल्यूसी सदस्य पासांग छिरिंग भूटिया ने कहा कि राज्य में बाल श्रम धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने पहचान, बचाव और पुनर्वास में डीटीएफ की सक्रिय भूमिका की सराहना की तथा बताया कि अधिकांश मामले उत्तर बंगाल और नेपाल से जुड़े होते हैं। नेपाल से संबंधित मामलों को अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में रखा जाता है, जिनमें कानूनी प्रक्रिया लंबी होती है और ऐसे मामलों में डीटीएफ समन्वय तेज कर बच्चों की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
कानूनी पहलुओं पर बोलते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिकाश तिवारी ने बताया कि बाल श्रम और तस्करी से संबंधित अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होते हैं। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता के तहत बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए सख्त प्रावधानों, बढ़ी हुई सजाओं और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने वाले प्रावधानों की जानकारी भी दी।
बैठक के अंत में खुले संवाद सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें अधिकारियों ने प्रमुख चुनौतियों, जमीनी स्तर की समस्याओं और प्रभावी रोकथाम रणनीतियों पर चर्चा की। बैठक में एडीसी नामची तिर्संग तमांग, सीईओ नामची जीपी शर्मा, एएलसी (श्रम) मोहन छेत्री, पैनल अधिवक्ता गीता सुब्बा तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी और सदस्य उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत बाल श्रम पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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