गंगटोक : मुख्य सचिव आर. तेलंग ने आज ताशीलींग सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें शहरी क्षेत्रों में जल संकट, वनाग्नि की रोकथाम तथा जंगली पक्षियों में एवियन इन्फ्लुएंजा (एच5एन1) के प्रकोप से संबंधित तैयारियों और उपायों की समीक्षा की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जलापूर्ति की स्थिति की समीक्षा करते हुए जन स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से लंबे शुष्क मौसम के कारण गंगटोक और मंगन में जल संकट की स्थिति बनी हुई है। पाइपलाइन और जलाशयों में रिसाव से होने वाली बर्बादी रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं तथा उपभोक्ता घरों में ओवरहेड टैंकों से पानी की बर्बादी रोकने हेतु घर-घर निरीक्षण किया जाएगा।
रातेछु में उपलब्ध जल के दोहन के लिए डायवर्जन वॉल का निर्माण शुरू हो चुका है। रातेछु स्रोत से डब्ल्यूटीपी सेलेप तक कच्चे जल की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज की पहचान कर तत्काल मरम्मत कार्य जारी है, जिससे सेलेप में जलस्तर में सुधार हुआ है। विभाग ने बताया कि फिलहाल उपभोक्ताओं को एक बार जलापूर्ति की जा रही है और आपूर्ति अवधि बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। आवश्यकता पड़ने पर जल टैंकर भी तैयार रखे गए हैं।
वनाग्नि की तैयारी पर वन विभाग ने बताया कि प्री-मानसून संवेदनशील मौसम को देखते हुए प्रारंभिक चेतावनी, रोकथाम और तैयारी पर केंद्रित सामुदायिक भागीदारी वाले कदम तेज किए गए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, रियल-टाइम निगरानी और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया गया है।
संयुक्त वन प्रबंधन समितियों, ईको-डेवलपमेंट समितियों, पंचायतों, एनजीओ और क्विक रिस्पॉन्स टीमों के सहयोग से रोकथाम गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। विभाग पुलिस, सेना और आईटीबीपी के साथ समन्वय कर त्वरित आपात प्रतिक्रिया सुनिश्चित कर रहा है। वन क्षेत्रों के पास रहने वाले नागरिकों से अपील की गई है कि वे जंगलों के समीप कृषि अवशेष न जलाएं, कैम्पफायर को बिना निगरानी न छोड़ें और किसी भी आग की घटना की तुरंत सूचना दें।
पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने जंगली पक्षियों में एवियन इन्फ्लुएंजा (एच5एन1) की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि रानीपुल बाज़ार, मणिपाल क्षेत्र और फॉरेस्ट कॉलोनी के आसपास कौवे, कबूतर और एक पेकिंग रॉबिन सहित जंगली पक्षियों की असामान्य मृत्यु दर्ज की गई है। इसके अलावा पाकिम जिला के बरदांग स्थित डोसा प्वाइंट में एक उल्लू की मृत्यु भी हुई है।
बताया गया कि भारत सरकार की एवियन इन्फ्लुएंजा कार्ययोजना के अनुसार तुरंत नियंत्रण और रोकथाम उपाय लागू किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी, व्यापक सैनिटाइजेशन और डिसइन्फेक्शन अभियान चल रहे हैं। वन एवं वन्यजीव अधिकारियों के लिए फील्ड स्तर पर निगरानी और रिपोर्टिंग मजबूत करने हेतु विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय बनाए रखें, निवारक उपायों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें और राज्य में जनस्वास्थ्य, पर्यावरण तथा आवश्यक सेवाओं की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें।
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