शासन में मजबूती के लिए क्षमता निर्माण आवश्यक : मुख्य सचिव

गंगटोक : सिक्किम सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा मिशन कर्मयोगी के तहत आज चिंतन भवन में “संस्थागत क्षमता निर्माण : प्रशिक्षण से प्रदर्शन-आधारित शासन तक” विषय पर एक राज्य-स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य सचिव आर तेलंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

यहां अपने संबोधन में तेलंग ने कहा कि शासन में मजबूती और सेवा वितरण में सुधार लाने हेतु क्षमता निर्माण केंद्रीय महत्व रखता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण को प्रदर्शन से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि एक व्यवस्थित शिक्षण प्रक्रिया अधिकारियों को उभरती हुई प्रशासनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाती है और समग्र संस्थागत दक्षता को बढ़ाती है।

मुख्य सचिव ने व्यक्तिगत-केंद्रित कार्यप्रणाली से हटकर एक प्रणाली-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रणालियों की संरचना इस प्रकार होनी चाहिए कि कार्य की निरंतरता सुनिश्चित हो और सुचारू बदलाव संभव हो सके, जिससे प्रक्रियाएं कुशलतापूर्वक कार्य कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि शासन हमेशा जन-केंद्रित होना चाहिए और सेवाओं के वितरण को एक एहसान के बजाय एक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। एक सुव्यवस्थित प्रणाली व्यक्तियों पर निर्भरता को कम करती है और विभिन्न विभागों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में एकरूपता सुनिश्चित करती है।

तेलंग ने आगे अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों के समान वितरण को जरूरी बताते हुए कहा कि कार्य संस्कृति में इस तरह का बदलाव प्रशासन को मजबूत करेगा और विकास परिणामों को बढ़ावा देगा। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि शासन में पारदर्शिता और मापने योग्य परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही तंत्र को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए। ऐसे में, उन्होंने अधिकारियों से कार्यशाला को सीखने के एक अवसर के रूप में लेकर प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने विभागों में लागू करने का आग्रह किया।

वहीं, कार्मिक सचिव रिनजिंग छेवांग भूटिया ने भी विभिन्न विभागों में क्षमता निर्माण को संस्थागत बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई नीतियों और प्रौद्योगिकियों के साथ शासन प्रणालियों के लगातार विकसित होने की बात कहते हुए इस बात पर जोर दिया कि लोक सेवा के क्षेत्र में निरंतर सीखना अत्यंत आवश्यक है।

भूटिया ने बताया कि अधिकारियों के आत्म-सुधार में सहायता हेतु आईगॉट प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यक्तिगत शिक्षण मार्ग उपलब्ध हैं। उन्होंने विभागाध्यक्षों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने कार्यालयों के भीतर प्रशिक्षण और संबंधित अभ्यासों को सुगम बनाएं, और प्रतिभागियों को इस पहल का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

सचिव ने आगे कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत 2 से 8 अप्रैल तक एक राष्ट्रीय क्षमता निर्माण पहल ‘साधना सप्ताह’ मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य निरंतर सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना, सरकारी अधिकारियों की क्षमताओं को मजबूत करना और सेवा वितरण में सुधार लाना है।

इससे पहले, कार्मिक विभाग की विशेष सचिव थिनले पेमा चंकापा ने स्वागत भाषण दिया। उनके साथ, प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक सह विशेष सचिव महेश शर्मा ने कार्यशाला का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया और राज्य में आईगॉट के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने राज्य में की जा रही विभिन्न गतिविधियों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिनमें विभिन्न विभागों में आयोजित अभिविन्यास कार्यक्रम, कार्यशालाएं और परामर्श सत्र शामिल थे।

शर्मा ने स्पष्ट किया कि क्षमता निर्माण योजनाओं के एक भाग के रूप में, विभिन्न विभागों को अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की पहचान करना, कार्यों का व्यवस्थित आवंटन सुनिश्चित करना और निगरानी तंत्र स्थापित करना अनिवार्य है। कार्यक्रम में एक चर्चा सत्र भी हुआ, जिसमें नोडल अधिकारियों ने क्षमता निर्माण योजनाओं के तहत अपने-अपने विभागों की प्रगति से संबंधित अद्यतन जानकारी साझा की। इस कार्यशाला में अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान मुख्य सचिवों, विभागाध्यक्षों, सचिवों, नोडल अधिकारियों और संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया।

#anugamini

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National News

Politics