स्वच्छता का आकलन वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित होना चाहिए : आर. तेलंग

गंगटोक : मुख्य सचिव आर तेलंग ने आज ताशिलिंग सचिवालय स्थित तीस्ता लाउंज में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य स्तरीय एपेक्स समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक की शुरुआत ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अनिल राज राई के स्वागत भाषण एवं एजेंडा प्रस्तुतीकरण से हुई।

मुख्य सचिव आर. तेलंग ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छता का आकलन वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित होना चाहिए। मूल्यांकन के लिए आंकड़ों का संग्रह एवं उपयोग आवश्यक है तथा कमियों की पहचान के लिए सांख्यिकीय, डाटा-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कचरा प्रबंधन से संबंधित समुचित डाटाबेस तैयार करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विभागों को प्लास्टिक बोतलों के आयात एवं निस्तारण संबंधी आंकड़े एकत्र करने के निर्देश दिए। उन्होंने योजनाओं में व्यय प्रावधान शामिल करने तथा नागरिकों के लिए विजुअल कम्युनिकेशन सामग्री तैयार करने की भी सलाह दी।

मुख्य सचिव ने ग्राम पंचायत इकाइयों से जल संरक्षण एवं वनाग्नि की रोकथाम के प्रति समुदायों को जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को जल स्रोतों एवं कैचमेंट क्षेत्रों के संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए तथा गांव स्तर पर जागरुकता अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित विभागों के समन्वय से इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की विशेष सचिव एवं मिशन निदेशक कोशी कपिल ने पिछली एपेक्स समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्रवाई, राज्य में कार्यान्वयन की स्थिति तथा वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित वार्षिक कार्यान्वयन योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रमुख कार्य बिंदुओं में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, स्वच्छतम ग्राम पंचायत इकाई मानदंड में समावेशन, संस्थानों में स्वच्छता एकीकरण, सूचना-शिक्षा-संचार गतिविधियों को सुदृढ़ करना, अभियान मोड में कार्यान्वयन, विद्यालयों में इन्सिनरेटर का शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि जिलों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन प्रणाली, सामुदायिक स्वच्छता परिसर तथा फीकल स्लज एवं सेप्टेज प्रबंधन प्रणाली कार्यरत हैं। इसके साथ ही स्वच्छ विद्यालय कार्यक्रम और आईईसी गतिविधियों का भी संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्यान्वयन योजना में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, मासिक धर्म अपशिष्ट एवं स्वास्थ्य प्रबंधन, ग्रे वॉटर प्रबंधन, फीकल स्लज प्रबंधन, व्यक्तिगत घरेलू शौचालय, सामुदायिक स्वच्छता परिसर, क्षमता निर्माण तथा आईईसी गतिविधियां शामिल हैं। समिति ने योजना के विभिन्न घटकों और समयसीमा की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों एवं जिलों को अभियान मोड में कार्यान्वयन तथा परिसंपत्तियों के संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में विभिन्न विभागों के सचिव, विभागाध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। अंत में संयुक्त सचिव एवं राज्य समन्वयक, ग्रामीण विकास विभाग, दीपक राई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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