सीमांत राज्य विकास पर कार्यशाला आयेाजित

विभिन्न परियोजनाओं पर हुई चर्चा

गंगटोक : सीमांत राज्य विकास पर कार्यशाला का आज गंगटोक के एक स्थानीय होटल में आयोजित हुआ। इसका आयोजन सिक्किम सरकार और नीति आयोग द्वारा किया गया ।

सत्रों में सीमांत क्षेत्रों के विकास के क्षेत्रवार दृष्टिकोण, जैविक कृषि और उत्तर–पूर्व के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा की गई। इनमें नीतिगत ढांचे, सामुदायिक सहभागिता, कृषि प्रणाली, उद्यम विकास, बुनियादी ढांचा, संपर्क व्यवस्था और सीमांत व दूरस्थ क्षेत्रों में आजीविका तंत्र पर विचार किया गया। पहला तकनीकी सत्र ‘समग्र सीमांत क्षेत्र विकास’ विषय पर था, जिसकी अध्यक्षता और संचालन नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक मेजर जनरल के. नारायणन ने किया।

प्रस्तुति में सिक्किम सरकार के योजना एवं विकास विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री खुशबू गुरुंग ने राज्य में जीवंत ग्राम कार्यक्रम-1 के तहत चल रहे परियोजनाओं पर जानकारी दी और युमथांग हॉट स्प्रिंग्स परियोजना, इको-टूरिज्म परियोजना तथा अन्य प्रचलित पहलों के बारे में अद्यतन विवरण प्रस्तुत किया।

इसके बाद कर्नल ललित खंडपाल ने रणभूमि दर्शन जैसी पहलों पर प्रस्तुति दी, जिसमें सिक्किम प्रेरणा स्थल, डोकलाम व्यू पॉइंट और चो ला पास जैसे सीमांत क्षेत्रों में आगंतुकों के प्रवेश से जुड़ी पहलें शामिल हैं। उन्होंने सामुदायिक सहभागिता और युवाओं की भागीदारी की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा और हाइड्रोपोनिक्स पर भी प्रकाश डाला, साथ ही सैन्य–नागरिक सहयोग पहलों तथा सीमांत क्षेत्रों तक सुपरकार रैली ड्राइव के परिणामों का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य संपर्क, पर्यटन और सीमांत क्षेत्रों से जुड़ाव बढ़ाना है।

इसी प्रकार नागालैंड सरकार के डूडा निदेशक टी वाती एयर ने समुदाय-नेतृत्व वाले विकास पर प्रस्तुति दी और बुनियादी ढांचे, संपर्क व्यवस्था, आजीविका कार्यक्रम, खेल गतिविधियां, सीमा-पार व्यापार, बाजार संपर्क तथा कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का उल्लेख किया।

मणिपुर सरकार की निदेशक (योजना) डॉ आरके राधेसना देवी ने समुदाय-नेतृत्व वाली कनेक्टिविटी और लचीलापन पर बात की और भौतिक, डिजिटल, सेवा, संस्थागत और पारिस्थितिक संपर्क के साथ-साथ आपदा-प्रवण क्षेत्रों, पर्यावरणीय चिंताओं और मौसम-संबंधी व्यवधानों का उल्लेख किया।

अरुणाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक अतुल तायेंग ने एकीकृत आजीविका विकास पर प्रस्तुति दी और बताया कि 455 गांवों को जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया है। उन्होंने सर्व-ऋतु सड़क संपर्क, संचार नेटवर्क और बाजार संपर्क की सीमाओं की ओर संकेत किया तथा आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, पारंपरिक प्रथाओं के उन्नयन और क्षमता निर्माण पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

दूसरा तकनीकी सत्र जैविक कृषि के विस्तार और उन्नयन पर केंद्रित था। सत्र की अध्यक्षता और संचालन सिक्किम सरकार के कृषि एवं बागवानी विभाग के प्रधान सचिव प्रदीप कुमार ने किया। सिक्किम सरकार के कृषि सचिव जेडी भूटिया ने अपने प्रस्तुतीकरण में सिक्किम की जैविक यात्रा और उसकी प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभाग के दृष्टिकोण और मिशन के साथ-साथ राज्य में प्रचलित कृषि पद्धतियों की जानकारी दी।

एपीडा के क्षेत्रीय प्रमुख (पूर्वोत्तर एवं लद्दाख) संदीप साहा ने निर्यात और प्रमाणन संबंधी संपर्कों पर प्रकाश डाला और एपीडा का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। मिजोरम कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक बी रममीनेओंगा ने जैविक कृषि की ओर संक्रमण की रणनीतियों पर बात की और राज्य में जैविक खेती के विस्तार से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों का उल्लेख किया।

मेघालय की उपनिदेशक (बागवानी) एवं सीओओ (एमईजीएनओएलआईए) सुश्री डी बरिशिशा मुखिम ने अपने प्रस्तुतीकरण में हरित विकास के लिए एफपीओ के एकीकरण पर चर्चा की और निर्यातोन्मुख बुनियादी ढांचे की आवश्यकता बताई।

सिक्किम के मेवेदिर के मुख्य परिचालन अधिकारी रेंजिनो लेप्चा ने मेवेदिर द्वारा लागू जैविक मूल्य श्रृंखला पहलों पर बात की। उन्होंने बाजार संपर्क और उत्पाद विकास को मजबूत करने के उपायों, तथा संचालन के विस्तार, प्रमाणन और बाजार पहुंच से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया। तीसरा तकनीकी सत्र उत्तर–पूर्व के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित था। इसकी अध्यक्षता और संचालन सिक्किम सरकार के वाणिज्य और उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव गोपाल के छेत्री ने किया।

सिक्किम एआईसी-एसएमआईटी के सीईओ डॉ चिंगथाम ने नवाचार को संस्थानों, उद्यमियों, बाजार और नीतिगत समर्थन से जुड़े एक समेकित तंत्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्य जैव विविधता-आधारित स्थिरता का आधार बनते हैं और क्षेत्र में आधुनिक कृषि उद्यमिता आवश्यक हो गई है। उन्होंने बाजार पहुंच और संपर्क संबंधी चुनौतियों की ओर भी संकेत किया और युवाओं को भविष्य उन्मुख नवाचार में शामिल करने की आवश्यकता बताई।

त्रिपुरा की अकुवेआ हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि दिप्तनिल चक्रवर्ती ने क्षेत्र में दीर्घकालिक और उत्तरदायी स्वास्थ्य सेवा को समर्थन देने वाली नेतृत्व की अवधारणा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और नवाचार का परिणाम मापनीय होना चाहिए।असम के एनकैम्प एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि रतन घिमिरे ने नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु संबंधी चुनौतियों और समुदायों के भीतर टिकाऊ आजीविका के लिए न्यायसंगत अवसरों की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने सिक्किम की इको-टूरिज्म पहलों की भी सराहना की।

सिक्किम की अगापी संस्था की प्रतिनिधि सुश्री श्रीजना श्रेष्ठा ने महिला-केंद्रित आजीविकाओं पर आधारित पर्वतीय विकास मॉडल के रूप में अगापी का उल्लेख किया और कम प्रभाव उत्पादन, जिम्मेदार उपभोग और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के तरीकों पर चर्चा की। तकनीकी सत्र के बाद चर्चा का दौर हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने प्रश्न पूछे और सुझाव साझा किए।

कार्यशाला में इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग सिक्किम (आईटीएस) के उपाध्यक्ष सीपी शर्मा, नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक मेजर जनरल के. नारायणन, नीति आयोग भारत सरकार के प्रतिनिधि, उत्तर–पूर्वी राज्यों के अधिकारी, सिक्किम सरकार के अधिकारी, एपीडा के सदस्य, मेवेदिर सिक्किम के प्रतिनिधि, उत्तर–पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधि और उद्यमी उपस्थित थे। सत्र का समापन नीति आयोग के मैक्रो–अर्थशास्त्री एवं नीति रणनीतिकार डॉ दर्शजीत सेनगुप्ता के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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