बंगलुरु । कर्नाटक की सियासत में इन दिनों बजट से ज्यादा चर्चा ‘कुर्सी’ और ‘विश्वास’ की हो रही है। बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ी बात कही है। साथ ही साथ, उन्होंने अंधविश्वास और परंपराओं को लेकर विपक्ष के तंज की धज्जियां उड़ा डाली है।
विधानसभा के भीतर सिद्धारमैया आत्मविश्वास से लबरेज नजर आए। दरअसल, सदन में विपक्ष के नेता आर अशोक ने डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच कथित ‘कुर्सी की लड़ाई’ को लेकर तंज कसा। इसके जवाब में सिद्धारमैया ने कहा, अगर कांग्रेस हाईकमान की इजाजत रही, तो मैं अभी दो और बजट पेश करूंगा। हमारी सरकार 2028 में फिर से सत्ता में वापसी करेगी।
बता दें कि सदन में एक वक्त ऐसा भी आया जब मुद्दा ‘राहु काल’ और ‘शुभ मुहूर्त’ पर आ गया। विपक्ष के नेता आर अशोक ने तंज कसते हुए कहा कि सीएम ने 6 मार्च को रात 1.15 बजे बजट पेश किया, जिससे वह ‘राहु काल’ से बच सकें। इस पर सिद्धारमैया ने जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि मैं राहु काल, गुलिका काल या यमगंध काल जैसी चीजों में रत्ती भर भी विश्वास नहीं रखता। मैंने अतीत में इन्हीं अशुभ समयों में बजट पेश किए हैं। इस बार भी कुछ लोगों ने सलाह दी थी। लोकतांत्रिक नेता होने के नाते मैंने उनकी भावनाओं का सम्मान किया। सिद्धारमैया ने कहा कि उनका अपना तर्क यकीन और विज्ञान में है।
सिद्धारमैया ने कहा कि लोग त्योहारों पर मांसाहार नहीं करते, लेकिन मैंने शिवरात्रि के दिन मटन खाया। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मेरे लिए सभी दिन बराबर हैं। मैं उस भगवान में विश्वास करता हूं जो कण-कण में है, न कि सिर्फ मंदिरों की दीवारों में कैद है।
विपक्ष के नेता अशोक ने कहा कि सीएम ने अपने डिप्टी को मंदिरों के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया है। हाल ही में डीके शिवकुमार असम के कामाख्या मंदिर से लौटे हैं। अशोक ने कहा कि अब सिद्धारमैया को भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना शुरू कर देना चाहिए।
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