लॉटरी और शराब पर निर्भर नहीं रह सकते केरल के लोग : शशि थरूर

नई दिल्ली । कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार राज्य को प्रवासियों की ओर से भेजे गए पैंसे (रेमिटेंस), लॉटरी और शराब पर निर्भर बनाए रख रही है। इस तरह की व्यवस्था आगे नहीं चल सकती। उन्होंने कहा, संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के लिए यह एक अहम मुद्दा है, जो पिछले एक दशक से सत्ता से बाहर है।

उन्होंने एलडीएफ सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया। थरूर ने कहा कि राज्य सरकार के पास सितंबर तक वेतन देने के लिए पैसे खत्म हो जाते हैं और उसे भुगतान करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। जब पूछा गया कि क्या कांग्रेस का मुख्य मुद्दा पिनरई विजयन सरकार के खिलाफ सत्ता की नाराजगी होगा, तो शशि थरूर ने कहा, नहीं, मुझे लगता है कि हमारा मुद्दे इससे कहीं ज्यादा बेहतर और आगे की सोच वाला है। यह केरल 2.0 के बारे में है। थरूर ने कहा, हां, सरकार के खिलाफ लोगों में कुछ नाराजगी है। हमारे अभियान के प्रमुख नारों में से एक यह है कि अब समय आ गया कि सरकार ने जो भी गलत काम किए हैं, उनका हिसाब लिया जाए।

उन्होंने आगे कहा, इसके अलावा हमारे पास एक बहुत ही सकारात्मक संदेश भी है। उदाहरण के लिए , महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा से लेकर बेहतर पेंशन भुगतान तक हमने पांच खास गारंटी देने की बात की है, जिसे वाम मोर्चा सरकार लगातार पूरा करने में असफल रही है। 149 सीटों वाली केरल विधानसभा के लिए नौ अप्रैल को चुनाव होंगे। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि पार्टी का घोषणापत्र जारी होना अभी बाकी है। लेकिन जिन बातों पर वे जोर दे रहे हैं, उनमें राज्य में कारोबार के लिए माहौल और खुला और अनुकूल बनाना शामिल है।

कांग्रेस नेता ने कहा, केरल में हम हमेशा प्रवासी लोगों से आने वाले पैसे, लॉटरी और शराब पर निर्भर नहीं रह सकते, जबकि फिलहाल यही चीजें राज्य को चला रही हैं। उन्होंने वाम सरकार के आय के तरीके की आलोचना की। थरूर ने कहा, क्या आपको पता है कि हम कर्ज चुकाने, उस पर ब्याज देने और वेतन व पेंशन पर उतना पैसा खर्च कर देते हैं, जितना हम सभी विकास कार्यों पर मिलाकर खर्च करते हैं। यह शर्म की बात है।

थरूर ने कहा, इस तरह की व्यवस्था अब नहीं चल सकती। अब जिम्मेदार प्रबंधन की जरूरत है। लेकिन इसे अपने ही लोगों पर ज्यादा कर (टैक्स) लगाकर नहीं किया जा सकता। केरल के लोग पहले से ही भारत में सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं। अब हमें ऐसा राजस्व चाहिए, जो नए कारोबार और नए उद्यमों से आए।

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