‘संयम सरेंडर नहीं, शक्ति है’, पश्चिम एशिया संकट पर बोले शशि थरूर

नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद शशि थरूर पश्चिम एशिया संकट पर अपनी पार्टी के उलट पूरी तरह से मोदी सरकार के स्टैंड के साथ खड़े हैं। उन्होंने पहले मीडिया के सामने बार-बार दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर जो रुख अपना रही है, उसी में देश का हित है। अब उन्होंने कहा है कि अगर कांग्रेस की सरकार होती तो भी उनका स्टैंड यही होता।

अपनी बातों के समर्थन के लिए केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक अखबार के लिए पूरा आर्टिकल भी लिखा है, जिसमें मोदी सरकार की आलोचना करने वाले लिबरल्स की जमकर खिंचाई भी की है। अब उन्होंने बताया है कि अगर कांग्रेस की सरकार भी होती तो वे यही कहते कि ‘संयम में भी शक्ति’ है।

शशि थरूर ने बताया है कि पश्चिम एशिया संकट पर उनके रुख और उनकी पार्टी के रुख में क्या अंतर है। कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता सोनिया गांधी की ओर से इस मामले में सरकार की ओर से चुप्पी पर सवाल खड़े करने पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, सोनिया गांधी और विपक्ष ने जो कुछ कहा है, उसका मैं पूरी तरह से सराहना करता हूं..क्योंकि हम विपक्ष में हैं और हमारे लिए मोरल स्टैंड लेने की गुंजाइश है। आर्टिकल मुख्य तौर पर इसपर है कि सरकार को क्या करना चाहिए?

दरअसल, गुरुवार को एक अखबार के लिए लिखे गए आर्टिकल में शशि थरूर ने पश्चिम एशिया संकट पर मोदी सरकार के स्टैंड की आलोचना करने वाले लिबरल्स को न सिर्फ लताड़ लगाई है, बल्कि स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत ने पश्चिम एशिया पर जो चुप्पी वाली रणनीति अपनाई है, वह सरेंडर नहीं है, वह एक तरह से जिम्मेदारी के साथ निभाई जा रही कूटनीति है।

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