नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और गहराता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में फैबियन ने कहा कि इस पूरे विवाद में ईरान बेहद समझदारी के साथ ‘शतरंज की बिसात’ बिछा रहा है। वहीं ट्रंप ‘हकीकत से दूर एक काल्पनिक दुनिया’ में जी रहे हैं।
पूर्व राजनयिक KP Fabian ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए कहा कि जैसा राष्ट्रपति ट्रंप कह रहे हैं, वैसा बिल्कुल नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। उन्होंने ईरान की रणनीति को समझाते हुए कहा कि ईरान का सीधा स्टैंड है कि जो देश उसके मित्र हैं, उनके जहाजों को वहां से गुजरने दिया जाएगा। लेकिन अमेरिका, इस्राइल और उनके सहयोगियों से जुड़े जहाजों को वहां से निकलने की इजाजत नहीं होगी।
फैबियन ने कहा कि इसका सीधा मतलब खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों से है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन्हीं जीसीसी देशों में बने अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए कर रहा है।
फैबियन ने बताया कि हाल ही में फ्रांस के एक जहाज को होर्मुज से सुरक्षित जाने दिया गया। यह बेहद ध्यान देने वाली बात है क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप से कहा था कि इस समस्या का समाधान कूटनीति से निकलेगा, न कि युद्ध से। इसी तरह जापान की एक कंपनी ‘मित्सुई ओएसके लाइन्स’ के जहाज को भी ईरान ने रास्ता दिया। फैबियन के मुताबिक, यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी, वहां लगभग 200 जहाज फंसे हुए हैं। लेकिन ईरान का जापान के जहाज को जाने देना असल में जापान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने जैसा था।
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और डोनाल्ड ट्रंप की हालिया मुलाकात पर फैबियन ने बताया कि ट्रंप ने व्हाइट हाउस में जापानी पीएम को ‘पर्ल हार्बर’ की याद दिलाई और जापान से अपनी सैन्य भागीदारी बढ़ाने को कहा।
फैबियन ने कहा कि ट्रंप चाहते हैं कि जापानी नौसेना अमेरिकी एडमिरल के आदेशों पर काम करे। ट्रंप नाटो देशों से भी मदद मांग रहे हैं, जिसका कोई मतलब नहीं बनता। आप ब्रिटेन, इटली या जर्मनी की नौसेना को बिना किसी कंबाइंड कमांडर के सिर्फ अमेरिकी इशारों पर नाचने के लिए नहीं कह सकते। ट्रंप सार्वजनिक तौर पर यह बातें नहीं कहते, लेकिन उनकी मंशा यही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को देखकर यह साफ है कि ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच का तनाव फिलहाल किसी भी कीमत पर कम होने वाला नहीं है।
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