यूसीसी के बहाने हिन्दू कानून थोपे जा रहे : असदुद्दीन ओवैसी

अहमदाबाद । देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही बहस के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी के बहाने सरकार मुसलमानों पर हिन्दू उत्तराधिकार कानून थोपने की कोशिश कर रही है, जो संविधान के खिलाफ है। हैदराबाद के सांसद ने कहा कि भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की पूरी आजादी देता है। लेकिन यूसीसी के जरिए मुसलमानों के पर्सनल लॉ को खत्म कर उन पर दूसरे धर्म के कायदे-कानून लादे जा रहे हैं।

Asaduddin Owaisi ने यूसीसी के ड्राफ्ट को लेकर कहा कि शादी, तलाक और विरासत को लेकर इस्लाम में अपने अलग नियम हैं। लेकिन सरकार जो यूसीसी ला रही है, उसमें तलाक के लिए व्यभिचार का सबूत मांगना, अदालती दखल और विशेष परिस्थितियां जैसी चीजें शामिल की गई हैं। ये सभी हिन्दू धर्म और उनके कानूनों का हिस्सा हैं। इन्हें जबरन मुसलमानों पर क्यों थोपा जा रहा है?

ओवैसी ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। ओवैसी के मुताबिक, मुसलमानों का अपना एक अलग विश्वास और उसूल हैं और इस तरह का कोई भी कानून निकाह जैसे पवित्र रिश्ते की गरिमा को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने दावा किया कि नए कानून में गुजारा भत्ता, एलिमनी और संपत्ति के बंटवारे के जो नियम रखे जा रहे हैं, वे पूरी तरह से हिन्दू पर्सनल लॉ से प्रेरित हैं।

यूसीसी कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को अनिवार्य रूप से पंजीकृत करने के प्रावधान पर भी ओवैसी ने भाजपा और आरएसएस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो संगठन भारतीय संस्कृति और संस्कारों की दुहाई देते नहीं थकते, वे अब लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने पर चुप क्यों हैं?

बता दें कि देश में यूसीसी को लेकर काफी समय से घमासान मचा हुआ है। उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बना जिसने इसे कानून के रूप में पास किया। सरकार का तर्क है कि यूसीसी से देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा, जिससे महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा और समाज में विसंगतियां दूर होंगी। वहीं, ओवैसी समेत कई मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि भारत विविधताओं का देश है और यहां हर धर्म के लोगों को अपने पर्सनल लॉ के हिसाब से जीने का हक है। सरकार का यह कदम देश की अखंडता और धार्मिक स्वतंत्रता के ढांचे को चोट पहुंचाएगा।

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