नई दिल्ली । डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर लगातार सरकार के फोकस के बीच चीफ ऑफ इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (सीआईएससी) एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ भारत में हथियार बनाना नहीं है। उन्होंने तीनों सेनाओं में जॉइंटनेस पर भी जोर दिया और बताया कि थिएटर कमांड बनाने के लिए 90 पर्सेंट प्लान तैयार है। साथ ही कहा कि सिर्फ ढांचा बना देने से तालमेल अपने आप नहीं आता। असली फर्क तब पड़ता है जब अलग-अलग फोर्स के बीच सोच और काम करने के तरीके में एकरूपता आए।
इंडियन मिलिट्री के सेमिनार रण संवाद में एयर मार्शल Ashutosh Dixit ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ भारत में हथियार बनाना नहीं है। इसका मतलब यह भी है कि हम तकनीक के अहम हिस्सों, जैसे सॉफ्टवेयर, एन्क्रिप्शन, डेटा के नियम और अपग्रेड की प्रक्रिया पर अपना पूरा नियंत्रण रखें। अगर हमारे पास यह नियंत्रण नहीं होगा तो सबसे मुश्किल समय में हमें दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
उन्होंने दुनिया में चल रहे युद्धों से मिले सबक का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच टकराव, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस का एक अहम उदाहरण बनकर उभरा है। बहुत लंबी दूरी तक हमला करने वाले स्टील्थ बॉम्बर विमान, समुद्र से हवाई ताकत देने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप, हिंद महासागर में सबमरीन की गतिविधियां और ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के समन्वित हमले, ये सब देखने को मिला है।
इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को सीमित करने की कोशिश की यानी भौगोलिक स्थिति और आर्थिक ताकत को भी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे संघर्ष में कोई एक क्षेत्र निर्णायक नहीं रहा, हर क्षेत्र में मुकाबला जारी है। साथ ही इसने यह भी दिखाया कि क्षेत्रीय अस्थिरता कितनी जल्दी हमारे करीब पहुंच सकती है। हाल ही में श्रीलंका से करीब चालीस नॉटिकल मील दूर एक ईरानी नेवल शिप को डुबो दिया गया, उस इलाके में जहां भारत के अहम हित जुड़े हुए हैं।
एयर मार्शल आशुतोष ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के शुरुआती दौर में यह दिखा कि एक छोटी सेना भी कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों, अंतरिक्ष आधारित संचार, सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क और सटीक हमलों का इस्तेमाल करके एक बड़ी सेना को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि निर्णायक चीज कोई एक हथियार नहीं था, बल्कि जानकारी जुटाने, निशाना तय करने और हमला करने की पूरी प्रक्रिया को एक साथ जोड़कर, रियल-टाइम में काम करने वाली व्यवस्था थी। उन्होंने कहा कि सबक यह है कि लचीलापन और अलग-अलग सिस्टम का तालमेल अब विकल्प नहीं हैं, बल्कि जिंदा रहने की जरूरी शर्त हैं।
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