गंगटोक : पीआईबी, गंगटोक द्वारा सिक्किम के ग्रामीण विकास विभाग के साथ आज यहां विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) पर एक दिवसीय मीडिया वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसमें राज्य भर से आये प्रेस बिरादरी के सदस्यों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
इस अवसर पर विशेष आईपीआर सचिव अनीता सुब्बा ने पिछले साल दिसंबर में मनरेगा की जगह लाए गए वीबी-जी राम जी बिल के बारे में बताते हुए कहा कि यह निश्चित ग्रामीण रोजगार को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करती है, टिकाऊ बुनियादी ढांचा तथा सतत आजीविका बनाने पर फोकस के साथ 60:40 (पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के लिए 90:10) केंद्र-राज्य फंडिंग पैटर्न को फॉलो करती है और पारदर्शिता पक्का करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करती है। उन्होंने लोगों तक इसकी सही जानकारी पहुंचाने में पत्रकारों, पीआईबी और आईपीआर विभाग की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी एक विकास आधारित मिशन है, जिसकी सफलता पत्रकारों, पीआईबी और आईपीआर विभाग के बीच मजबूत संचार और सहयोग से असरदार तरीके से लागू करने पर निर्भर करती है।
कार्यशाला में पहले सत्र के दौरान, वीबी-जी राम जी सेल की विशेष सचिव सह प्रोजेक्ट डायरेक्टर छिरिंग ल्हादेन लाचुंग्पा ने योजना का पूरा अवलोकन दिया। उन्होंने सिक्किम के लिए इसकी अहमियत बताते हुए कहा कि राज्य में अभी लगभग 60,000 मनरेगा कर्मी हैं, जिनमें से लगभग 32,000 महिलाएं हैं, जो ग्रामीण कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने में स्कीम की भूमिका को दिखाता है।
साथ ही, लाचुंग्पा ने आगे इस योजना के जल सुरक्षा, अंदरूनी ग्रामीण बुनियादी ढांचा, रोजी-रोटी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट रेजिलिएंस पर फोकस पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि यह योजना फसलों की बुआई और कटाई के प्रमुख मौसम में 60 दिनों तक काम रोककर खेती को सपोर्ट करती है और एक सुरक्षित रोजगार गारंटी के साथ अंदाज़ा लगाया जा सकने वाला फंड देती है। उनके अनुसार, वीबी-जी राम जी का मकसद सिक्किम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए रोजी-रोटी की सुरक्षा मजबूत करना, ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण को बढ़ाना और समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देना है।
वहीं, कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वीबी-जी राम जी के स्टेट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीमा ताशी भूटिया ने अपनी प्रस्तुति के जरिए मनरेगा और इसके खास हिस्सों पर वीबी-जी राम जी की अहमियत पर जोर दिया। इसमें मजबूत रोजगार गारंटी, ग्रामीण संपत्ति निर्माण एवं प्लानिंग, तकनीकी एवं संस्थागत प्रणाली के जरिए जवाबदेही शामिल है।
इसके अलावा, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त केसांग तेनजिंग ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना पर अपने सत्र में सरकारी पहलों के बारे में सही जानकारी फैलाने में प्रेस और पीआईबी की भूमिका को स्वीकार करते हुए 2024 के केंद्रीय बजट में घोषित और कैबिनेट द्वारा स्वीकृत एम्प्लॉयमेंट-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम पर बात की। साथ ही, उन्होंने योजना के डुअल-वर्टिकल स्ट्रक्चर के बारे में बताया, जिससे नए कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को आधार और पैन से जुड़े डीबीटी के जरिए फायदा होगा। उन्होंने रोजगार सृजन के लिए एम्प्लॉयर इंसेंटिव, वेज-लिंक्ड सब्सिडी स्लैब और एम्प्लॉई के लिए लॉन्ग-टर्म बेनिफिट के बारे में भी विस्तार से बताया।
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