दार्जिलिंग : आज इण्डियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के केंद्रीय कार्यालय में पार्टी की बैठक आयोजित हुई। बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के केंद्रीय संयोजक अजय एडवर्ड्स (Ajoy Edwards) ने कहा कि हिंसक आंदोलन का युग समाप्त हो चुका है, अब गोरखाओं की दीर्घकालीन मांग को पूरा करने के लिए लोकतांत्रिक मार्ग अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि अब चुनाव के माध्यम से ही हम अपनी मांग को लक्ष्य तक पहुंचा सकते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव होने में अब 50–60 दिन शेष हैं, जिसके बाद दार्जिलिंग, कार्सियांग, कालिंपोंग और मिरिक नगरपालिकाओं के चुनाव होंगे। इसी प्रकार 12 महीने बाद जीटीए चुनाव होगा। पंचायत क्षेत्रों में पंचायत प्रधानों से सदस्य संतुष्ट नहीं हैं। गांव-गांव के दौरे के दौरान निर्वाचित पंचायत सदस्यों ने बताया कि वे आने वाले विधानसभा चुनाव के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। कई प्रधानों पर दूसरों के कागज लगाकर अपने नाम से काम करने के आरोप हैं, जिससे सदस्य नाराज़ हैं। प्रधानों द्वारा कमीशन लेने के कारण विधानसभा चुनाव का परिणाम अनित थापा दाजू के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
एडवर्ड्स ने कहा कि अनित थापा अक्सर सभाओं में कहते हैं कि उनके पास दो साल का समय है और वे जीतेंगे या हारेंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में पहाड़ की तीन सीटों पर उनकी पार्टी हार जाती है तो उनका राजनीतिक आधार पूरी तरह कमजोर हो जाएगा। रातोंरात पहाड़ के बोर्ड गिरने लगेंगे, नगरपालिकाओं के चुनाव से पहले ही स्थिति बदल जाएगी और जीटीए बोर्ड की हालत भी डगमगा जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आज सत्ता दल के अधिकांश सभासद केवल नाम मात्र के हैं और चार-पांच को छोड़ बाकी ने कोई काम नहीं किया।
उन्होंने कहा कि इंटरलोक्यूटर भी आ चुका है, इसलिए हमें यह बताना होगा कि जीटीए पहाड़, तराई, डुआर्स और गोरखाओं की आकांक्षाएं पूरी नहीं कर सकता। वर्तमान राजनीतिक स्थिति को सत्ताधारी नेतृत्व अच्छी तरह समझता है और भीतर से निराश है, लेकिन बाहर सब ठीक होने का दिखावा कर रहा है। यदि विधानसभा चुनाव में पहाड़ की तीनों सीटों पर वे हारते हैं तो उनका राजनीतिक आधार खत्म हो जाएगा और भाजपा में जाने की उनकी सोच भी टूट जाएगी, क्योंकि भाजपा हारने वालों को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने कहा कि पहाड़ में परिवर्तन लड़ाई-झगड़े से नहीं बल्कि चुनाव के माध्यम से लाना होगा और यह सुनहरा अवसर गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनित थापा से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, बल्कि ‘गोरखालैंड मांगने का मुद्दा केवल खाने का साधन है’ जैसी उनकी सोच का विरोध किया गया है। यह बात इण्डियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही गई।
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