एक हजार से अधिक फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया

मंगन : उत्तर सिक्किम के लाचेन में बीते 5 अप्रैल को हुए भूस्खलन के बाद फंसे सभी पर्यटकों का बचाव अभियान पूरा कर लिया गया है। तारम चू में बने अस्थायी पैदल पुल को पार करने के बाद पर्यटक गंगटोक की ओर आगे बढ़ चुके हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सभी पक्षों के समन्वित प्रयासों के बाद लाचेन से सभी पर्यटकों का बचाव अभियान आज सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। मंत्री और क्षेत्रीय विधायक सामदुप लेप्चा तारम चू में मौजूद रहे और अस्थायी पैदल पुल के माध्यम से पर्यटकों के स्थानांतरण की निगरानी की। मंगन जिला कलेक्टर अनंत जैन, सेना, बीआरओ, लाचेन जुम्सा और पर्यटन से संबंधित हितधारकों के सक्रिय समन्वय के तहत पर्यटकों को निकाला गया।

तारम चू से चुंगथांग होते हुए गंगटोक तक पर्यटकों को ले जाने के लिए विशेष बसों और पर्यटक वाहनों की व्यवस्था की गई थी। एक ओर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन की एक टीम तारम चू में पर्यटकों का सुरक्षित स्थानांतरण सुनिश्चित कर रही थी, जबकि मंगन के एडीसी, एसडीएम, आरटीओ और उनकी टीम ने चुंगथांग सार्वजनिक मैदान में पर्यटकों के लिए यात्रा प्रबंधन का समन्वय किया।

 

तारम चू में बचाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंत्री लेप्चा ने भारतीय सेना और बीआरओ के अधिकारियों से मुलाकात की और उनके निरंतर प्रयासों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। साथ ही, उन्होंने पर्यटकों से भी मुलाकात की और उनके गंतव्य की ओर उनकी यात्रा के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की। मंत्री ने जिला प्रशासन और बचाव अभियान में शामिल सभी एजेंसियों को धन्यवाद दिया और कहा कि प्रतिकूल मौसम और प्रबंधन चुनौतियों के बावजूद सामूहिक प्रयासों और सामुदायिक भावना के कारण अभियान सफल रहा।

उल्लेखनीय है कि, चुंगथांग-लाचेन मार्ग पर हुए भूस्खलन के कारण लाचेन गांव में 1,000 से ज़्यादा पर्यटक फंस गए। इसके बाद, जिला प्रशासन ने 6 अप्रैल को भारतीय सेना और बीआरओ की मदद से बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया। यह भूस्खलन हाल ही में शुरू किए गए ताराम चू पुल के ठीक बगल में हुआ। पुल का ढांचा तो सुरक्षित रहा, लेकिन पुल तक जाने वाली सडक़ धंस गई, जिससे गाडिय़ों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई और लाचेन का संपर्क एक बार फिर टूट गया।

बचाव कार्य में 8 अप्रैल से तेजी आई और यह आज पूरा हो गया। यह अभियान दो मोर्चों से अलग-अलग चरणों में चलाया गया। पर्यटकों को भारतीय सेना द्वारा ताराम चू के पास बनाए गए एक अस्थायी, संकरे पैदल पुल से गुज़ारा गया, जहां से सिक्किम राज्य परिवहन की बसें उन्हें गंगटोक ले गईं।

इसके साथ ही, फंसे हुए वाहनों को लाचुंग के ऊपर स्थित मुश्किल डोंगक्याला मार्ग से मोड़ा गया। इस काम में ऊंचाई पर स्थित गुरुडोंगमार-त्सो ल्हामू-डोंगक्याला मार्ग से गुजरना पड़ा, जहां सुरक्षित रास्ता बनाने के लिए बीआरओ और ग्रेफ को बर्फ और जमी हुई बर्फ हटानी पड़ी।

जानकारी के अनुसार, अब तक 135 पर्यटकों के साथ-साथ 32 हल्के वाहन और 10 मोटरसाइकिलें सुरक्षित निकाल ली गई हैं। इस काम में मेडिकल इमरजेंसी वाले मामलों को सबसे पहले प्राथमिकता दी गई। ईंधन की कमी की भी खबरें आईं, जिसके चलते ड्राइवरों को सेना द्वारा उपलब्ध कराई गई सीमित मात्रा पर ही निर्भर रहना पड़ा।

इधर, बाधाओं के बावजूद, फंसे हुए पर्यटकों ने लाचेन के लोगों की मेहमाननवाज़ी की तारीफ की, जिन्होंने संकट की इस घड़ी में उन्हें मुफ़्त में खाना और रहने की जगह दी। हालांकि, कई लोगों ने लाचेन-गुरुडोंगमार क्षेत्र में पर्यटन को बनाए रखने के लिए बेहतर सडक़ ढांचे और आपदा से निपटने के उपायों की तत्काल जरूरत पर जोर दिया। बहरहाल, पर्यटकों को सुरक्षित निकालने का काम अब पूरा होने के बावजूद लाचेन का संपर्क अभी भी टूटा हुआ है। वहां मरम्मत का काम जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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