गंगटोक : पश्चिम सिक्किम स्थित भारत-नेपाल सीमावर्ती चिवाभंज्यांग को दूसरे सीमा व्यापार मार्ग के तौर पर खोलने पर सिक्किम सरकार गंभीरता से आगे बढ़ रही है। यह जून में चीन के साथ फिर से शुरू होने वाले पूर्वी सिक्किम के नाथुला सीमा व्यापार मार्ग के बाद राज्य का दूसरा सीमा व्यापार केंद्र होगा।
राज्य सरकार का मकसद चिवाभंज्यांग मल्टीमॉडल कॉरिडोर के जरिए नेपाल के साथ भी दो-तरफा ट्रेड शुरू करना है, जिससे इलाके की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। अगर केंद्र सरकार इसे मंजूरी देती है, तो सिक्किम उन कुछ भारतीय राज्यों में शुमार हो जाएगा जिनके पास दो अंतर्राष्ट्रीय जमीनी सीमा व्यापार मार्ग होंगे।
बीते 26 मार्च को ही सिक्किम विधानसभा के एक दिवसीय सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) ने कहा, हमने उत्तरे-चिवाभंज्यांग सडक़ बनाई है और इसे और बढ़ाया है। हम केंद्र से चिवाभंज्यांग को सीमा व्यापार के लिए आधिकारिक रुप से खोलने का आग्रह कर रहे हैं और इस बारे में काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र के अधिकारी पहले ही इलाके का दौरा कर चुके हैं।
गौरतलब है कि चिवाभंज्यांग पश्चिम सिक्किम में भारत-नेपाल के बीच का सीमावर्ती इलाका है, जिसके सबसे पास सिक्किम का उत्तरे शहर है। सिक्किम सरकार ने पहले ही उत्तरे से चिवाभंज्यांग तक 18 किमी. का रोड लिंक बना दिया है। वहीं, नेपाल की तरफ सीमा से एक सडक़ पहले से मौजूद है जो तापलेजंग जिले के सबसे निकटवर्ती शहर च्यांगथापु से जुड़ती है। तापलेजंग, चिवाभंज्यांग सीमा से करीब तीन घंटे की ड्राइव पर है। हालांकि, 2026-27 में पूरे राज्य में रोड कारपेटिंग मिशन के दौरान उत्तरे-चिवाभंज्यांग सड़क पर कारपेटिंग की जानी है।
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने बताया कि चिवाभंज्यांग मार्ग को मल्टीमॉडल कॉरिडोर के तौर पर खोलने से दोनों देशों के बीच सीमा पार व्यापारिक गतिविधि बढ़ेगी। इस दौरान, उन्होंने 1950 की भारत-नेपाल संधि का भी जक्रि किया, जो दोनों देशों के बीच लोगों के मुक्त आवागमन की इजाजत देती है। उन्होंने कहा कि यह फ्रेमवर्क चिवाभंज्यांग जैसे ट्रेड रूट विकसित करने के मामले को मजबूत करता है, जिससे यात्री और सामान, दोनों का आना-जाना बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिवाभंज्यांग मार्ग से नेपाल की राजधानी काठमांडू लगभग सात घंटे में पहुंचा जा सकता है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बदलने की इसकी क्षमता को दिखाता है।
कहना न होगा कि चिवाभंज्यांग को सीमा व्यापार मार्ग के तौर पर खोलने से सिक्किम को एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक बढ़त मिलेगी, जो भारत-चीन के बीच नाथुला सीमा व्यापार के फिर से शुरू होने का भी इंतजार कर रहा है।
मुख्यमंत्री गोले ने सदन को बताया कि पूर्वी सिक्किम में नाथुला के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार जून से आधिकारिक रुप फिर से शुरू हो जाएगा, जो कोविड-19 महामारी के बाद छह साल से बंद था।
वहीं, विधानसभा में चर्चा के दौरान सोरेंग-चाकुंग के विधायक आदित्य गोले ने भी क्रॉस-बॉर्डर कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए चिवाभंज्यांग का जक्रि किया, जो सोरेंग विधानसभा क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर के जरिए व्यापार “निश्चित लूप में है” और बुनियादी ढांचागत विकास के साथ-साथ इसके और तेज होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, सदन में सिक्किम के सीमावर्ती इलाकों के विकास पर भी चर्चा हुई। सदन में उपस्थित राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सिक्किम के सीमावर्ती गांवों के विकास पर खास जोर दिया जा रहा है।
2023 में शुरू की गई इस पहल के पहले चरण में मंगन और गंगटोक जिलों के 46 गांवों की पहचान की गई है। हाल ही में शुरू किए गए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के दूसरे चरण में नेपाल और भूटान से सटे सीमावर्ती इलाकों को कवर करने के लिए इसका दायरा और बढ़ाया गया है। इस चरण में पाकिम, सोरेंग और गेजिंग जिलों के 12 गांवों की पहचान की गई है।
वहीं, विधायक आदित्य गोले ने वाइब्रेंट विलेज पहल के दूसरे चरण को सोरेंग जिले के सीमावर्ती इलाकों तक बढ़ाने का मुद्दा उठाया और इलाके की रणनीतिक तथा विकासमूलक महत्व पर जोर दिया। गोले ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार से भारत-नेपाल सीमावर्ती सोरेंग, दरमदीन और रिंचेनपोंग जैसे इलाकों को इस प्रोग्राम के तहत शामिल करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि पहले, बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम ऐसे इलाकों के लिए मुख्य फंडिंग सिस्टम के तौर पर काम करता था, जिसमें सोरेंग जिले को खास तौर पर 2021 के बाद अलॉटमेंट मिला।
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि कवर किए जाने वाले गांवों की सटीक सूची की पुष्टि अभी बाकी है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि उनके निर्वाचन क्षेत्र और उससे सटे सीमावर्ती क्षेत्रों पर विचार किया जाएगा।
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