दार्जिलिंग : सिटोंग-लाटपंचर समष्टि स्तरीय सभा को संबोधित करते हुए भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के महासचिव अमर लामा ने कहा कि उनकी पार्टी गोरखालैंड की मांग का कभी विरोध नहीं करती और केंद्र द्वारा बुलाई गई वार्ता में भाग लेने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने कई दस्तावेज सौंपे हैं, फिर भी ‘वार्ताकार’ भेजा गया, जिसकी आवश्यकता पर उन्होंने प्रश्न उठाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पृथक राज्य का आश्वासन केवल एक राजनीतिक बयान भर है।
अमर लामा ने बिना नाम लिए आईजीजेएफ के एक नेता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्षेत्रीयता बचाने का दावा करने वाले दलों ने अतीत में बड़ी पार्टियों के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा ने कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर दार्जिलिंग पहाड़ को स्वायत्तता देने हेतु संसद में ‘रीजनल ऑटोनॉमी’ विधेयक तक पहुंचाया था, हालांकि उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि बीजीपीएम राजनीति में आए हुए केवल पांच वर्ष हुए हैं और तृणमूल कांग्रेस के साथ संबंध परिस्थितियों के अनुसार पहाड़ के विकास हेतु बनाए गए हैं। गोजमुमो नेताओं की गृह मंत्री से मुलाकात पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य को केंद्रशासित प्रदेश में बदलने वाली सरकार से गोरखालैंड या 11 जनजातियों को मान्यता मिलने की संभावना संदिग्ध है। उनके अनुसार भाजपा के आश्वासन केवल “हवा मिठाई” समान हैं। यह जानकारी बीजीपीएम के प्रेस सचिव ज्योतिकुमार मुखिया द्वारा दी गई।
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