दार्जिलिंग : अलग राज्य की मांग उठाती आ रही गैर-राजनीतिक संस्था स्टेटहुड कोऑर्डिनेशन कमिटी (एसएचसीसी) द्वारा कालिंपोंग के गोरखा दुःख निवारक सम्मेलन भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने के बाद इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट (आईजीजेएफ) ने इस पहल को पूर्ण समर्थन दिया है। आईजीजेएफ के केंद्रीय संयोजक अजय एडवर्ड्स (Ajoy Edwards) ने एसएचसीसी की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पहाड़, तराई, डुआर्स और गोरखा समुदाय की दीर्घकालीन राजनीतिक मांग के समाधान के लिए गैर-राजनीतिक मोर्चे से उठी यह पहल महत्वपूर्ण है।
वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी प्रभाकर देवान के नेतृत्व में आयोजित बैठक में कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि तथा सामाजिक संगठन उपस्थित थे। एसएचसीसी के निमंत्रण पर आईजीजेएफ की ओर से पूर्व आईपीएस नर्बू भूटिया, पूर्व सभासद प्रकाश गुरुङ, फिन्जो वांगेल गुरुंग और कमल शर्मा सहित चार सदस्यीय दल मौजूद रहा। बैठक में गृह मंत्रालय द्वारा गोरखा मुद्दे पर वार्ताकार नियुक्त किए जाने पर विस्तृत चर्चा की गई और सभी नेताओं का मत रहा कि वार्ताकार से केवल अलग राज्य की मांग पर ही बातचीत होनी चाहिए।
एडवर्ड्स ने कहा कि अलग राज्य की मांग मूलतः राजनीतिक है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए सामाजिक संगठनों की समान भागीदारी आवश्यक है। समाजसेवी देवान की निःस्वार्थ पहल की सराहना करते हुए आईजीजेएफ ने स्पष्ट किया कि एसएचसीसी को इसलिए बनाया गया है ताकि पहाड़, तराई और डुआर्स तथा गोरखा जाति के हित में गैर-राजनीतिक रूप से काम किया जा सके।
आईजीजेएफ ने दावा किया कि वह स्थापना काल से ही “बंगाल के बाहर लेकिन भारत के भीतर” अलग व्यवस्था की मांग करता रहा है। पार्टी का कहना है कि पिछले 40 वर्षों में केवल राजनीतिक दलों द्वारा यह मुद्दा उठाने से लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ। एडवर्ड्स के अनुसार अब यदि गैर-राजनीतिक संस्थाएं आगे आएंगी तो चुनावी स्वार्थ के कारण मुद्दा भटकने से बच जाएगा।
एडवर्ड्स ने कहा कि पहाड़, तराई, डुआर्स और गोरखाओं के हित में आवाज उठाने वाले किसी भी समूह या व्यक्ति का राजनीतिक नजरिए से आकलन नहीं करना चाहिए। आईजीजेएफ का विश्वास है कि एसएचसीसी की इस पहल से सामूहिक दबाव बनेगा और भारत सरकार को दीर्घकालीन समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए बाध्य किया जा सकेगा।
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