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चाय बागानों में लागू हो न्यूनतम मजदूरी : अजय एडवर्ड्स

दार्जिलिंग : अजय एडवर्ड्स ने गोपाल धुरा चाय बागान के श्रमिकों के समक्ष एक प्रस्ताव रखते हुए कहा कि यह निर्णय आपके हाथ में है कि आप गुलामी का जीवन जीना चाहते हैं या अपने मालिक के घुटने टिकाकर अपना अधिकार मांगना चाहते हैं।

इंडियन गोरखा जनशक्ति मोर्चा के संयोजक अजय एडवर्ड्स ने आज गोपाल धुरा चाय बागान का दौरा किया। इस दौरान गोपाल धुरा चाय बागान के श्रमिकों ने उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें सौंपी गई प्रेस विज्ञप्ति में अपनी समस्याओं का जिक्र किया। श्रमिकों की भीड़ को संबोधित करते हुए आईजीजेएफ के संयोजक अजय एडवर्ड्स ने कहा कि पिछले चार वर्षों से हम पूजा बोनस के मुद्दे पर सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन मालिकों और सरकार द्वारा हमारी आवाज नहीं सुनी जा रही। 20 प्रतिशत पूजा बोनस के लिए हमारी मांग को मालिकों और सरकार द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया है।

उन्‍होंने कहा कि ठंड के दिनों में चाय बागान बंद करने से मालिक को कोई फर्क नहीं पड़ता है। इससे फर्क केवल श्रमिकों को पड़ता है। हम कहते रहे हैं कि हमें एक समझौते पर पहुंचने की जरूरत है और यही बात अनित थापा भी कहते रहे हैं। पिछले दिनों जब पूजा बोनस को लेकर समस्या आई तो अनित थापा जी ने खुद चाय श्रमिकों से कहा कि उन्हें पहले फ्लश की चाय की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। अनित दाजू के साथ श्रमिकों ने भी कहा कि वे पहले फ्लश की चाय की पत्तियां नहीं तोड़ेंगे। मलिकबर्ग ने श्रमिकों से वादा किया कि वह उन्हें 20 प्रतिशत पूजा बोनस देंगे और दशहरा को अच्छे तरीके से मनाने के लिए वे पहले से योजना भी बनाएंगे।

उन्‍होंने कहा कि कुछ चाय बागानों में हमारे श्रमिक संगठन नहीं हैं, लेकिन जब श्रमिक खुद सड़कों पर उतरे और अपने अधिकारों और विशेषाधिकारों के लिए आवाज उठाई, तो चाय बागानों की स्थिति खराब हो गई। हमारे संगठन को बनाने का मुख्य कारण हमारे श्रमिक बहनों और भाइयों को न्याय दिलाना है। वर्तमान में, श्रमिकों को 220 रुपये का दैनिक वेतन मिल रहा है, लेकिन सिक्किम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को 500 रुपये का दैनिक वेतन मिलता है। हम अब 220 रुपये में गुजारा नहीं कर सकते। एडवर्ड्स ने कहा, हमें न्यूनतम मजदूरी की जरूरत है। आज सिक्किम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को 500 रुपये दैनिक मजदूरी मिल रही है। पहले गोपाल धुरा चाय बागान में करीब 450 श्रमिक काम करते थे, लेकिन आज इसमें कमी आई है। ऐसा क्यों हो रहा है? हम इतनी कम आय में अपना घर नहीं चला सकते हैं, इसलिए हमारे लोगों को गांव छोड़कर दूसरी जगहों पर काम करने जाना पड़ता है।

एडवर्ड्स ने कहा कि बागान मालिकों का कहना है कि उनके पास पैसे नहीं हैं, बागान घाटे में चल रहा है। अगर बागान घाटे में चल रहा है तो एक बागान का मालिक तीन या चार और चाय बागान कैसे खरीद सकता है? कुछ साल पहले बागान मालिकों को श्रमिकों को घर, मेडिकल सुविधा और राशन दिए जाते थे लेकिन अब यह बंद हो गया है। अब केवल 220 रुपये की दैनिक मजदूरी दी जाती है। जब मजदूर अपने अधिकार की बात करते हैं तो वे बागान बंद कर देते हैं और पुलिस का डर दिखाते हैं। मालिक जो दो डर दिखा रहे हैं, उनसे वे कब मुक्त होंगे? कब तक 220 रुपये की जिंदगी जिएंगे? कब तक दशहरा और तिहाड़ (दिवाली) में नारे लगाएंगे। हम कब तक गरीबी में रहेंगे? अब इसे तोड़ने का समय आ गया है। अगर मालिक कहते हैं कि बागान घाटे में हैं, तो आप बागान क्यों चलाते हैं? एक चाय बागान के मालिक ने 12 चाय बागान खरीदे हैं, क्‍या अब भी आप कह सकते हैं कि बागान घाटे में हैं? हम गरीब हैं और मालिक हमारी गरीबी का फायदा उठाकर बागान बंद करने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन यह अधिक दिनों तक नहीं चलेगा।

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