दार्जिलिंग : राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने केंद्र सरकार से दार्जिलिंग पहाड़ समेत समूचे उत्तर बंगाल के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं (सीजीएचएस) को और अधिक सुलभ बनाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है।
सोमवार को राज्यसभा में बोलते हुए पूर्व विदेश राजनयिक से सांसद श्रृंगला ने कहा कि उत्तर बंगाल और सिक्किम में दो लाख से ज़्यादा केंद्र सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों के रहने के बावजूद उन्हें सिलीगुड़ी में सिर्फ एक केंद्र सरकारी स्वास्थ्य योजना के वेलनेस सेंटर से ही काम चलाना पड़ता है।
श्रृंगला ने कहा, इन लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं, सेवानिवृत्त कर्मियों और पुरानी और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का है, जो समय पर और किफायती स्वास्थ्य सेवा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकारी स्वास्थ्य योजना पर निर्भर हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद, वर्तमान में सिलीगुड़ी में सिर्फ एक सीजीएचएस वेलनेस सेंटर काम कर रहा है, जिससे पहाड़ और दूरदराज के इलाकों के निवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
उन्होंने बताया कि दार्जिलिंग शहर में कोई सीजीएचएस वेलनेस सेंटर नहीं है। ऐसे में, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कार्सियांग, मिरिक और अन्य क्षेत्रों के लाभार्थियों को बुनियादी सीजीएचएस सेवाओं का लाभ उठाने के लिए 80 से 120 किमी तक की यात्रा करनी पड़ती है।
सांसद ने आगे कहा, मैं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कार्सियांग, मिरिक, बागडोगरा, नक्सलबाड़ी और सिक्किम में कई सीजीएचएस वेलनेस सेंटर स्थापित करने का आग्रह करता हूं। साथ ही, मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में और अधिक निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक केंद्रों और नर्सिंग होम को तुरंत पैनल में शामिल करने और सिलीगुड़ी में सीजीएचएस के अतिरिक्त निदेशक का एक कार्यालय बनाने से स्थिति को सुधारने में मदद मिलेगी।
इसके साथ, श्रृंगला ने केंद्र से सिलीगुड़ी में मौजूदा सीजीएचएस वेलनेस सेंटर को अनुमोदन प्राप्त दूसरी इमारत में स्थानांतरित करने में तेजी लाने का भी आग्रह किया। उन्होंने लोगों को विशेष उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र के टर्शियरी केयर अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की भी मांग की।
दूसरी ओर, दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने स्वच्छ भारत मिशन शहरी योजना के तहत बंगाल को आवंटित फंड का विवरण साझा किया। उन्होंने ऐसे फंड के उपयोग में बंगाल सरकार के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया। सांसद ने एक बयान में कहा, राज्य को एसबीएम- 2.0 में ज़्यादा आवंटन के बावजूद, हमारे दार्जिलिंग पहाड़, तराई एवं डुआर्स की नगर पालिकाओं को अभी तक इसका फायदा नहीं मिला है।
सांसद ने सोमवार को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा लोकसभा में दिए गए एक जवाब का भी ज़िक्र किया। मंत्री के जवाब के अनुसार, 2014 और 2019 के बीच एसबीएम के पहले चरण में बंगाल को 911.34 करोड़ आवंटित किए गए थे। यह एसबीएम- 2.0 में 2021 से 2026 तक बढक़र 1,449.30 करोड़ हो गया, जिसमें से केंद्र ने अब तक 577.7 करोड़ जारी किए हैं।
सांसद ने कहा, ठोस कचरा प्रबंधन घटक के लिए यह आवंटन दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी, कार्सियांग, मिरिक और कालिम्पोंग के शहरी स्थानीय निकायों को मटेरियल रिकवरी सुविधाओं और कचरे से ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए केंद्रीय सहायता प्राप्त करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग पहाड़, तराई एवं डुआर्स जैसे पारिस्थितिक रूप से नाज़ुक और पर्यटन-आधारित क्षेत्रों में, नगरपालिकाएं स्रोत पर कचरा अलग करने में सुधार करने के साथ पुरानी डंपसाइट्स को ठीक कर सकती हैं और खुले में कचरा फेंकने पर रोक लगाने के लिए इलाके के हिसाब से सही तकनक अपना सकती हैं।
#anugamini #sikkim #darjeeling
No Comments: