मोतिहारी । मोतिहारी के एलएनडी कॉलेज सभागार में रविवार को ‘पुलिस की नागरिकों के प्रति जवाबदेही’ विषय पर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिरैया पुलिस जिले के डीआईजी हरकिशोर राय मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस संवाद में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ डॉक्टर, वकील और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और पुलिस व्यवस्था से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर सवाल रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा राष्ट्रगान से की गई। इसके बाद डीआईजी हरकिशोर राय ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस का मूल उद्देश्य जनसेवा है और जनता के साथ विश्वास का मजबूत रिश्ता बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिक पुलिस को अपना सहयोगी नहीं समझेगा, तब तक अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत नहीं किया जा सकता।
डीआईजी राय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप बिहार पुलिस में कई अहम सुधार लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने डिजिटल एफआईआर, ई-चालान प्रणाली, थानों में सीसीटीवी कैमरे, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और पुलिस वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि इन तकनीकी सुधारों से पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा कि अब आम लोगों को थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। ऑनलाइन शिकायत और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है।
डीआईजी ने पुलिस थानों को नागरिक-मित्र बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि थाने ऐसा स्थान होने चाहिए, जहां कोई भी व्यक्ति बिना भय के अपनी समस्या लेकर आ सके। पुलिस का व्यवहार सहयोगात्मक और संवेदनशील होना चाहिए, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के प्रति।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले एक वर्ष में जिले में दर्ज शिकायतों में से लगभग 85 प्रतिशत मामलों का 30 दिनों के भीतर निस्तारण किया गया है। साथ ही सामुदायिक पुलिसिंग के तहत गांव-गांव में ‘पुलिस-जन संवाद’ कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है और अपराध में लगभग 20 प्रतिशत तक कमी आई है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं, डॉक्टरों और वकीलों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध, रिश्वतखोरी, हिरासत में मौत, अस्पतालों में हिंसा, जांच और चार्जशीट में देरी जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाए। डीआईजी हरकिशोर राय ने सभी प्रश्नों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया।
उन्होंने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर थाने में महिला डेस्क की व्यवस्था की जा रही है। जीरो एफआईआर की सुविधा को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है, ताकि पीड़ित को किसी भी थाने में तुरंत शिकायत दर्ज कराने में परेशानी न हो। हिरासत में मौत के मामलों में मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य है और फोरेंसिक सुविधाओं के विस्तार पर भी काम चल रहा है।
डीआईजी राय ने कहा कि पुलिस और जनता के बीच नियमित संवाद जरूरी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कानून की जानकारी रखने और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग की भागीदारी से पुलिस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव संभव है।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामेश्वर प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि इस तरह के संवाद कार्यक्रम छात्रों और समाज के लिए बेहद उपयोगी हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।
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