गंगटोक : सिक्किम में पंचायती राज संस्थाओं को अब तक पूरी तरह सशक्त नहीं किया जा सका है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में सामने आया है कि संविधान के तहत पंचायतों को सौंपे जाने वाले 29 विषयों में से राज्य सरकार ने अब तक केवल 15 विषय ही पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित किए हैं।
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब मौजूदा पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्ति की ओर है और अगले पंचायत चुनाव 2027 के आसपास होने की संभावना है। संविधान के 73वें संशोधन के तहत पंचायतों को स्वशासित संस्थाओं के रूप में विकसित करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 11वीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों से संबंधित कार्य, शक्तियां और जिम्मेदारियां पंचायतों को सौंपे जाने की व्यवस्था है। इनमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, 29 में से 14 विषय अभी भी पंचायती राज संस्थाओं को नहीं सौंपे गए हैं। इसके कारण कई क्षेत्रों में योजना निर्माण, धन आवंटन और योजनाओं के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार के विभागों का ही नियंत्रण बना हुआ है। इससे निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों की निर्णय लेने की शक्ति सीमित रह गई है।
वहीं, कैग ने ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता में भी कमियां पाई हैं। ग्राम पंचायतों को स्थानीय कर, शुल्क और अन्य प्रकार के राजस्व वसूलने का कानूनी अधिकार है, लेकिन अधिकांश पंचायतों ने इन अधिकारों का उपयोग नहीं किया। केवल कुछेक मामलों में ही स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाने के प्रयास दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में राज्य सरकार के विभागों से पंचायतों को मिलने वाले धन के हस्तांतरण में भी अनियमितता की ओर ध्यान दिलाया गया है। धन प्रवाह में एक निश्चित व्यवस्था नहीं होने के कारण पंचायतों के लिए साल-दर-साल योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों पर खर्च करना कठिन हो रहा है। इसके अलावा, कैग ने विधायी निगरानी में भी कमी बताई है। पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित पूर्व की ऑडिट रिपोर्टों पर संबंधित विधानसभा समिति में चर्चा नहीं होने से रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई और जवाबदेही कमजोर हुई है।
संविधान के अनुच्छेद 243ई के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित है। पंचायत चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग की है, लेकिन अगले चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं किया गया है। बहरहाल, कैग की ताजा रिपोर्ट के बाद यह सवाल उठने लगा है कि अगले पंचायत चुनाव के बाद चुने जाने वाले प्रतिनिधियों को प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर कितने अधिकार मिल पाएंगे। नियमित चुनावों से स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की निरंतरता तो बनी हुई है, लेकिन रिपोर्ट से स्पष्ट है कि कार्यों और वित्तीय शक्तियों का पूर्ण हस्तांतरण अभी भी अधूरा है।
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