नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय ने साफ किया है कि भारतीय नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीद रहा है। उन्होंने बताया कि भारत 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले ले रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए कई देशों से बातचीत जारी है।
सरकार ने बताया कि होर्मुज में मौजूद भारतीय जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय कई देशों के साथ संपर्क में है ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित बने और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके।
पोत परिवहन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने जानकारी दी कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।
सरकार के अनुसार महानिदेशालय शिपिंग के जरिए अब तक 2,337 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इनमें से 75 नाविकों की वापसी पिछले 24 घंटों में हुई है। यह दिखाता है कि सरकार तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।
सरकार ने यह भी साफ किया कि देश के सभी बंदरगाहों पर कामकाज पूरी तरह सामान्य है। कहीं भी किसी तरह की भीड़भाड़ या बाधा की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत की समुद्री व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
सरकार का कहना है कि वह ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीद रही है। इससे देश में ईंधन संकट की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। साथ ही वैश्विक हालात को देखते हुए भारत संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है।
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