नशा मुक्ति पर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित

नामची : आज ईएमआरएस सुंतोले में नशा मुक्ति जागरुकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। यह कार्यक्रम नामची जिले की जिला कलेक्टर सुश्री अनुपा तामलिंग के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर छात्रों, शिक्षकों तथा विभिन्न विभागों से आए विशिष्ट अतिथियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम में सामाजिक कल्याण विभाग (एसडब्‍ल्‍यूडी), गंगटोक के अतिरिक्त निदेशक महेंद्र शर्मा; एसडीएम (मुख्यालय), नामची निम पिंछो भूटिया; उपनिदेशक, एसडब्‍ल्‍यूडी, गंगटोक राम कुमार तमांग; नशा मुक्ति केंद्र, चुवाटर के मनोचिकित्सक डॉ राजीव गुरुंग (संसाधन व्यक्ति); कल्याण अधिकारी, एसडब्‍ल्‍यूडी नामची सोनम दादुल भूटिया तथा ईएमआरएस सुंतले के प्राचार्य डॉ अमर कांति जना सहित विद्यालय के स्टाफ और छात्र उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य द्वारा स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। इसके बाद कल्याण अधिकारी सोनम दादुल भूटिया ने अतिथियों का औपचारिक परिचय देते हुए उनके योगदान और विशेषज्ञता पर प्रकाश डाला।

अतिरिक्त निदेशक महेंद्र शर्मा ने नशा सेवन पर एक महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें इसके कारणों और परिणामों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यदि लत को पढ़ाई, नृत्य या खेल जैसी सकारात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ा जाए तो यह लाभकारी भी हो सकती है। उन्होंने ‘एबीसी–एव्‍याइड बैड कंपनी’ (बुरी संगति से बचें) को एक महत्वपूर्ण निवारक उपाय बताया और नशे के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ राजीव गुरुंग ने मनोवैज्ञानिक और शारीरिक पहलुओं पर एक रोचक सत्र लिया। उन्होंने तनाव प्रबंधन के लिए एक व्यावहारिक श्वास अभ्यास से शुरुआत की। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण से संबंधित मस्तिष्क का भाग (प्रीफ्रंटल लोब) पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए अभिभावकों और बड़ों का मार्गदर्शन आवश्यक होता है। उन्होंने आगे बताया कि नशे की शुरुआत अक्सर प्रयोग के रूप में होती है, जो धीरे-धीरे निर्भरता में बदल जाती है। उन्होंने साथियों का दबाव, परीक्षा का तनाव और पारिवारिक समस्याओं को इसके मुख्य कारणों में गिनाया। उन्होंने नशे के दुष्प्रभावों जैसे उदासीनता, चिंता, कैंसर, गैस्ट्राइटिस आदि पर भी प्रकाश डाला। साथ ही सकारात्मक (व्यायाम, खेल, श्वास अभ्यास) और नकारात्मक (धूम्रपान, शराब) तनाव प्रबंधन के तरीकों में अंतर समझाया।

इसके बाद एक संवादात्मक सत्र हुआ, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और अतिथियों ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए। एसडीएम (मुख्यालय), नामची निम पिंछो भूटिया ने भी सभा को संबोधित किया और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कोप्‍टा कानून के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। उन्होंने छात्रों के लिए आगामी करियर काउंसलिंग सत्रों की भी घोषणा की। इसके साथ ही नशा मुक्त जीवन के लिए शपथ ग्रहण कराया गया, जिसका संचालन राम कुमार तमांग ने किया। कार्यक्रम का समापन मिस यांगचेनला गेजिंग (पीजीटी अंग्रेज़ी) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रभावशाली रहा, जिसने छात्रों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक किया और उन्हें सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

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