नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत चुपचाप नहीं रह सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपने हितों का ध्यान रखते हुए वार्ता में सीधे हस्तक्षेप किए बिना अपने रणनीतिक विकल्पों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए। शशि थरूर ने कहा कि हम सिर्फ तमाशा देखने वाले नहीं बन सकते। साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान का मध्यस्थ बनना भारत के लिए कोई झटका है।
सीएनएन-न्यूज18 से खास बातचीत में शशि थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र में भारत के बड़े रणनीतिक, आर्थिक हित जुड़े हुए हैं और उसे कूटनीतिक रूप से सतर्क रहना चाहिए। थरूर ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि भारत को मध्यस्थता की भूमिका में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, लेकिन सरकार को यह आकलन करते रहना चाहिए कि हालात के अनुसार आगे क्या करना है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो भारत को देखना चाहिए कि वह क्या कर सकता है। बदलते हालात को देखते हुए स्थिति के अनुसार भारत को अपने विकल्प खुले रखने चाहिए। साथ ही थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान को इस स्तर पर वार्ता में भारत की प्रत्यक्ष भागीदारी की वकालत के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं यह सुझाव नहीं दे रहा हूं कि भारत को वार्ता में शामिल होना चाहिए। साथ ही कहा कि भारत का शांत रहना कोई कमजोरी नहीं बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला है। सरकार को कोई भी कदम राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर उठाना चाहिए। शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि द्विपक्षीय संबंध विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत-अमेरिका संबंधों में कोई नकारात्मकता न आए।
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