पीएम स्वनिधि योजना लागू करने को लेकर जिलास्तरीय बैठक आयोजित

पाकिम : रेनाक शहर के लिए पीएम स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना लागू करने को लेकर आज शहरी विकास विभाग द्वारा डीआईसी में एक जिला-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहरी विकास विभाग के विशेष सचिव जिग्मी वांगचुक भूटिया, पाकिम जिला कलेक्टर रोहन अगवाने, एसडीएम (मुख्यालय) थेनडुप लेप्चा के साथ-साथ रेनोक बीडीओ एसके ढुंगाना,  सहायक यूडीडी निदेशक वीणा मोक्तान और गंगटोक यूडीडी के अधिकारियों ने भाग लिया।

इस दौरान, पाकिम डीसी ने संबंधित अधिकारियों को योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार योजना का समय पर और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु एक जिला-स्तरीय समिति गठित करने और पात्र स्ट्रीट वेंडरों की पहचान की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। वहीं सहायक यूडीडी निदेशक वीणा मोक्तान ने अपनी एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से पीएम स्वनिधि योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पुनर्गठित योजना की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि इसे कोविड-19 महामारी के दौरान स्ट्रीट वेंडरों के समर्थन तथा उनकी आजीविका के पुनरुद्धार और उत्थान को सुगम बनाने के लिए एक राहत उपाय के रूप में शुरू किया गया था। उन्होंने इस योजना के तहत ऋण ढांचे के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि इस योजना में तीन किस्तों में बिना किसी गारंटी के वर्किंग कैपिटल ऋण दिया जाता है। साथ ही, समय पर लोन चुकाने को बढ़ावा देने के लिए ब्याज पर सब्सिडी भी दी जाती है।

इसके अलावा, मोक्तान ने योजना के उद्देश्यों के बारे में भी बताया, जिनमें वित्तीय समावेशन, रेहड़ी-पटरी वालों को आर्थिक मदद और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में, राज्य और जिला स्तर पर भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई, जिसमें योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने, लाभार्थियों की पहचान करने और लोन वितरण की निगरानी करने पर खास ध्यान दिया गया। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा 1 जून, 2020 को शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना, एक विशेष सूक्ष्म-ऋण सुविधा है जिसका उद्देश्य स्ट्रीट वेंडरों को किफायती वर्किंग कैपिटल ऋण प्रदान करना है। कोविड-19 राहत उपायों के हिस्से के रूप में शुरू की गई यह योजना, विक्रेताओं को अपनी आजीविका गतिविधियों को फिर से शुरू करने और बनाए रखने में सहायता करती है। इसके अतिरिक्त, इस योजना का दायरा वैधानिक शहरों से आगे बढ़ाकर जनगणना शहरों और उप-शहरी क्षेत्रों को भी शामिल करने के लिए विस्तारित किया गया है, जिससे अधिक सडक़ विक्रेता इसके दायरे में आ गए हैं।

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