नई दिल्ली । ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की पहल पर करीब 60 से अधिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ऑनलाइन तरीके से होर्मुज संकट पर गुरुवार को चर्चा की। सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विक्रम मिसरी ने किया और अध्यक्षता ब्रिटेन के विदेश मंत्री यवेट कूपर ने की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य की आंशिक नाकाबंदी के मद्देनजर सुरक्षित समुद्री परिवहन सुनिश्चित करना था।
Vikram Misri ने वर्चुअल माध्यम से चर्चा में भाग लेते हुए क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन मार्गों की सुरक्षा पर नई दिल्ली का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने दुनियाभर के देशों के सामने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही हर देश का हक है। इससे कोई समझौता नहीं हो सकता। विदेश सचिव ने चिंता जताई कि इस पूरे संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
ब्रिटेन की ओर से बुलाई गई बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात जो भारत ने दुनिया के सामने रखी, वह थी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा। विदेश सचिव ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में भारत इकलौता ऐसा देश है, जिसने अपने जांबाज नाविकों को खोया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का हल और अधिक युद्ध नहीं है। अगर दुनिया को इस संकट से बाहर निकलना है, तो सभी पक्षों को तुरंत हथियारों को शांत कर बातचीत की मेज पर लौटना होगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, भारत का पक्ष स्पष्ट है। हम स्वतंत्र और खुले वाणिज्यिक परिवहन और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री सुरक्षा के पक्षधर हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।
जायसवाल ने बताया कि ब्रिटेन ने भारत समेत कई देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया था और मिसरी ने इसमें भाग लिया। उन्होंने कहा, हम ईरान और अन्य देशों के संपर्क में हैं ताकि एलपीजी और एलएनजी सहित अन्य उत्पादों को ले जाने वाले हमारे जहाजों के लिए निर्बाध और सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित कर सकें। पिछले कुछ दिनों में हुई इन वार्ताओं के कारण भारतीय ध्वज वाले छह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार करने में सक्षम हुए हैं। हम इस मामले पर संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं। सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष से संबंधित सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है।
वहीं, बैठक के बारे में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा, होर्मुज से जहाजरानी सेवाओं को फिर से शुरू करना आसान नहीं होगा और इसके लिए समुद्री उद्योग साझेदारी के अलावा सैन्य शक्ति और राजनयिक गतिविधियों का एक संयुक्त मोर्चा आवश्यक होगा। स्टार्मर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील को स्पष्ट नकार चुके हैं कि ब्रिटेन व यूरोप के अन्य देशों को होर्मुज खुलवाने के लिए सेना का इस्तेमाल करना चाहिए।
इस बीच, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन का मुद्दा ईरान युद्ध का ही परिणाम है और जब तक लड़ाई जारी रहेगी, जलडमरूमध्य स्थिर नहीं रहेगा। वांग यी ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद से फोन पर बातचीत के दौरान ये टिप्पणियां कीं, जिसमें उन्होंने शीघ्र युद्धविराम का भी आह्वान किया।
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